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अधूरे प्यार की एक अधूरी कहानी

प्यार वो एहसास है, जो हर किसी को नहीं होता।
प्यार वो महसूस है। जिसके अंदर खो जाने का दिल करता है। यही एक एहसास मैं आपको बताना चाहता हूँ।
शाम का समय था। मैं अपने दोस्त का इंतजार कर रहा था। स्टेशन के बाहर।
हमलोग का बाहर कही घूमने जाने का प्लान था और मैं जल्दी पहुँच गया था।
कुछ समझ नही आ रहा था की मैं क्या करूँ। मैं स्टेशन के पास जा के बैठ गया, तभी कुछ ऐसा हुआ कि मेरी जिन्दगी एक अलग मोड़ लेने वाली थी।
स्टेशन की तरफ मैं देख रहा था की मेरा दोस्त आया की नहीं तभी अचानक से मेरी नज़र एक लड़की पर पड़ी।
वो जो वक़्त था मैं पूरी तरह कुछ देर के लिए थम सा गया था। मैं सब भूल गया था की मैं कहा हूँ क्यों हूँ ?
बस मेरी आँखे उस लड़की की तरफ से हट ही नहीं रही थी और इस तरह से मैं उसे देखता ही जा रहा था ।
उसकी मासूम चेहरा, उसकी छोटी-छोटी आंखी, उसके मासूम सा चेहरे पे वो मासूम सी उसकी हंसी जैसे मानो कोई परी हो वो..उसे देख पहली नज़र मे मानो दिल को कुछ होने लगा था।
क्या वो प्यार था??
मुझे नहीं पता बस दिल बोल रहा था कि मेरा दोस्त कुछ देर बाद आये या ये वक़्त रुक जाए।
मुझे उसका नाम जानना था। उसके बारे में बहुत कुछ पता करने को दिल कर रहा था लेकिन कैसे करूँ ये समझ ही नहीं आ रहा था।
जब कुछ समझ नहीं आया तब मैंने बस भगवान से प्रार्थना किया की मुझे ये लड़की मेरी जिन्दगी में चाहिए।
वो जा रही थी। मेरी आँखों से दूर मुझे रोकना था उसे। उससे बातें करना था। उससे दोस्ती करनी थी और उसे अपने दिल की बात बतानी थी।
लेकिन कैसे ???
यही सवाल बस बार-बार मेरे मन में आ रहा था और मुझे बैचैन किये जा रहा था।
मैंने फिर सोच लिया कि मेरी आँखों से दूर होने से पहले मुझे इसका नाम पता चल जाये तो मैं इससे अपना बनूँगा और शायद भगवान् ने ही उसे भेजा होगा मेरे लिए ये मैं समझूंगा तभी भगवन ने चमत्कार कर दिया..पीछे से आवाज आया प्रिया मैं यहां हूँ।
फिर वो पीछे देखि तो मैंने देखा वहां से एक लड़की आवाज दी और वो उस क पास चली गयी..तभी मैं समझा उस लड़की का नाम प्रिया था।
मैं खुश हो गया और उस लड़की को मन किया जा के धन्यवाद बोल दू क्योंकि उसी के वजह से मुझे उस का नाम पता चला।
बस तभी मैंने ठान ली अब उसे अपना बनाना है, उसे अपनी जिन्दगी में लाना है।
फिर तभी मै उसके पिछे जाने लगा कि अचानक ही पीछे से एक हाथ आया।
पीछे देखा तो दोस्त आ गया था। अब मैं क्या करूँ समझ नहीं आ रहा था..मैं क्या बोलूँ उससे..कैसे मना करूँ उससे?..कैसे जाऊ मैं उस के पीछे ?
मैं इसी सोच में लगा रहा रहा तब तक वो मेरी आँखों से दूर जा चुकी थी दिल मानो रोने लगा था और तभी मानो ऐसा लगा कि जैसे सब कुछ एक सपना सा था बस और आँखे खुल गया तो सपना टूट गया।
मैं वहा से चला तो गया अपने दोस्त के साथ लेकिन पूरी रास्ते बस उसी के बारे में सोचता रहा।
मानो मेरा दिल अब उसके ख्याल से निकलने को तैयार ही नहीं था।
दूसरे दिन मैं कॉलेज लिए तैयार हो गया और मैं कॉलेज पंहुचा।
और बेंच पे जा क बैठ गया..तभी दोस्त ने बुलाया और कहा देख अपने कॉलेज में एक नई लड़की आयी है।
मेरा मन अभी भी बस उसी के ख्यालों मे डूबा हुआ था। आँखों से उस का चेहरा मनो हट ही नही रहा था…वो बार बार मुझे आवाज दिये जा रही था।
तभी मुझे गुस्सा आया और पीछे उससे बोलने जा ही रहा था कि मैं रुक सा गया।
मेरी नजर मानो फिर से एक बार सपनों मे चला गया। मैंने देखा की वही थी।
मानो जैसे मेरी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा मैं खुद को रोक ही नहीं पा रहा था और मेरे समझ में ही नहीं आ रहा था की मैं क्या करू ?
क्या बोलता मैं, बस जा के अपने दोस्त के गले लग गया..और हंसने लगा…तभी पता चला वही वह नई लड़की थी जो कॉलेज में आज पहला दिन आयी थी।
मैं तो मानो हवा मे उड़ने लगा..फिर मैंने एक दिन अपने दोस्त को बताया की ऐसा ऐसा है..उसने कहा जा के बोल दे उसे अपने दिल की बात..
लेकिन मैं डरता था। कि वो क्या कहेगी..क्या लगेगा उसे..यही सोच के मैं हमेशा रुक जाता था।
मैं सोचने लगता था कि कही वो मेरी बातें सुन के मुझसे दूर न हो जाए।
मैं उससे दूर नहीं होना चाहता था।
मुझे ये एहसास हो गया था कि शायद वो भी मुझे पसंद करती थी। लेकिन वो कभी कुछ नहीं कहती थी। उससे लगता कि मेरे मन
मै उस क लिए कुछ नहीं है। लेकिन वो क्या जाने कि उसे पहली नजर में देख के ही मैंने उसे अपना दिल दे चुका था।
दिन बीतते गए हमलोग एक अच्छे दोस्त की तरह साथ रहते और बाते करते थे..लेकिन न कभी मुझे हिम्मत हुआ उससे कुछ भी कहने का ना और ही उसे ….वक़्त बीत गया और इस तरह हमलोग की पढ़ाई पूरी हो गयी।
लेकिन मेरे दिल मे उसके के लिए अभी भी पहला और आखरी प्यार था और शायद उस के लिए भी। और इस तरह से
हमे सबको अलग अलग कंपनी मे जॉब लग गई थी तभी बस एक दिन मैंने सोच लिया कि अब बस.. मैं उससे कल जा के दिल की बात बता ।
दूंगा…. मैं अगले दिन सुबह उठा और मैंने उसे फ़ोन किया और उससे कहा की मुझे मिलना है उससे ..उसने मिलने क लिए हां कर दिया और इस बात से मुझे बहुत ख़ुशी मिला।
हमलोग ने एक समय निर्धारित किया था और मैं समय से पहले वहां उसका इंतजार कर रहा था ….तभी मेरी नजर उस पे पड़ी.. वही कपडे..वही बैग..
वही छोटी-छोटी आँखे और चेहरे पे वही प्यारी से मुस्कान, मानो ऐसा लग रहा था..की वही पहला दिन हो..जब मैंने उसे पहली बार देखा था..वो धीरे धीरे आ रही थी।
मैं तो बस उसे देखता ही जा रहा था..फिर वो पास आती है..फिर वो मेरे सामने बैठ जाती है..तभी बस..मैंने उससे कहा की मुझे कुछ कहना है उससे।
फिर तभी उसने भी कह दिया की मुझे भी कुछ कहना है तुम्हें …मैं खुश हो गया.. मुझे लगा की आज वो भी अपने दिल की बात बोल देगी…फिर मैंने उससे कहा
दिया कि तुम पहले बोल दो…उसने तो पहले मना किया पहले बोलने से..लेकिन मैंने ही जिद कर दिया… कि पहले तुम बोले और वो बोलने जा रही थी।
मानो मेरी सांस रुक गए थे..उसकी बाते सुनने क लिये…सब कुछ थम सा गया…बस ऐसा लगा मैं और वो..और कुछ नही है आस-पास…फिर
उसने अपने बैग से एक कार्ड निकाला..और दिया मुझे…वो जो पल था।
वही पहला पल..जब मुझे लगा कि मेरा सपना था..और सपना टूट
गया…उस कार्ड मैं उसकी शादी का आमंत्रण था…बस..फिर क्या..सब कुछ वहीं रुक गया…. शायद मैंने बहुत देर कर दी उससे अपनी दिल की बात बताने मे..श्याद बहोत-बहोत देर… फिर उसने मुझसे पूछा.. कि तुम क्या कहना चाहते थे ?
मैं क्या कहता तब..बात बदल दी..और वो चली गयी…और मैं वही बैठे रह गया….मुझे उसे अपना बनाने का बस एक सपना ही था शायद…….जो एक समय पे आ क टूट गया….वो आज का दिन और
पहला दिन…मानो क्यों आया था मेरी जिन्दगी मैं अब तक ये बात समझ नही आया….
पहला दिन भी एक सपने की तरह आई और कुछ देर बाद टूट गयी…और ये आज का पल..जो फिर से एक सपना बनकर पल मै टूट गया……..
इसीलिए दोस्तों कभी भी अपनी दिल की बात बताने मे देर ना करो… वरना इतना देर हो जाता है कि….अपने प्यार को बस सपने मैं ही अपना बनाना पड़ जाता है…

 

प्यार में बदला खुद को

पत्नी ने पति से कहा, “कितनी देर तक समाचार पत्र पढ़ते रहोगे ?
यहाँ आओ और अपनी प्यारी बेटी को खाना खिलाओ”
पति ने समाचार पत्र एक तरफ़ फेका और बेटी की ध्यान दिया,बेटी की आंखों में आँसू थे और सामने खाने की प्लेट… ।
बेटी एक अच्छी लड़की है और अपनी उम्र के बच्चों से ज्यादा समझदार ।
पति ने खाने की प्लेट को हाथ में लिया और बेटी से बोला,”बेटी खाना क्यों नहीं खा रही हो?
आओ बेटी मैं खिलाऊँ.”
बेटी जिसे खाना नहीं भा रहा था, सुबक सुबक कर रोने लगी और कहने लगी,”मैं पूरा खाना खा लूँगी पर एक वादा करना पड़ेगा आपको.” ।
“वादा”, पति ने बेटी को समझाते हुआ कहा, “इस प्रकार कोई महँगी चीज खरीदने के लिए जिद नहीं करते.” ।
“नहीं पापा, मैं कोई महँगी चीज के लिए जिद नहीं कर रही हूँ.” फिर बेटी ने धीरे धीरे खाना खाते हुये कहा,
“मैं अपने सभी बाल कटवाना चाहती हूँ.” ।
पति और पत्नी दोनों अचंभित रह गए और बेटी को बहुत समझाया कि लड़कियों के लिए सिर के सारे बाल कटवा कर गंजा होना अच्छा नहीं लगता है ।
पर बेटी ने जवाब दिया, “पापा आपके कहने पर मैंने सड़ा खाना, जो कि मुझे अच्छा नहीं लग रहा था, खा लिया और अब
वादा पूरा करने की आपकी बारी है.” ।
अंततः बेटी की जिद के आगे पति पत्नी को उसकी बात माननी ही पड़ी ।
अगले दिन पति बेटी को स्कूल छोड़ने गया ।
बेटी गंजी बहुत ही अजीब लग रही थे. स्कूल में एक महिला ने पति से कहा, “आपकी बेटी ने एक बहुत ही बड़ा काम किया है ।
मेरा बेटा कैंसर से पीड़ित है और इलाजमें उसके सारे बाल खत्म हो गए हैं ।
वह् इस हालत में स्कूल नहीं आना चाहता था क्योंकि स्कूल में लड़के उसे चिढ़ाते हैं. पर आपकी बेटी ने कहा कि वह् भी गंजी होकर स्कूल आयेगी और वह् आ गई ।
इस कारण देखिये मेरा बेटा भी स्कूल आ गया ।
आप धन्य हैं कि आपके ऐसी बेटी है ” ।
पति को यह सब सुनकर रोना आ गया और उसने मन ही मन सोचा कि आज बेटी ने सीखा दिया कि प्यार क्या होता है ।
इस पृथ्वी पर खुशहाल वह नहीं हैं जो अपनी शर्तों पर जीते हैं बल्कि खुशहाल वे हैं
जो, जिन्हें वे प्यार करते हैं, उनके लिए बदल जाते है !
प्यार के लिए जो ख़ुशी से खुद को बदल दे वो ही सच्चा प्यार होता है।
अगर खुद को बदलना एक मजबूरी लगे तो वो प्यार नहीं एक समझौता है।

 

एक लड़की की दुख भरी प्यार की कहानी

एक लड़की थी। बहुत ही खूबसूरत।
जितनी वह सुंदर थी, उतनी ही ईमानदार।
न किसी से झूठ बोलना, न किसी से फालतू की बातें करना।
बस अपने काम से काम रखना।
“उसी क्लास में एक लड़का था। वह मन ही मन उससे बहुत प्यार करता था।
लड़का अक्सर उसके छोटे-मोटे काम कर दिया करता था।
बदले में जब लड़की मुस्करा कर थैंक्यू कहती थी, तो लड़के की खुशी की सीमा नहीं रहती थी।
एक बार की बात है। दोनों लोग साथ- साथ घर जा रहे थे।
तभी जोरदार बारिश होने लगी।
दोनों को एक पेड़ के नीचे रुकना पडा पेड़ बहुत छोटा था,
बारीस की बुन्दे छन-छन कर उससे नीचे आ रही थीं।
ऐसे में बारिश से बचने के लिए दोनों एक दूसरे के बेहद करीब आ गये।
लड़की को इतने करीब पाकर लड़का अपने जज्बातों पर काबू न रख सका।
उसके लड़की को प्रजोज कर दिया।
लड़की भी मन ही मन उसको चाहती थी।
इसलिए वह भी राजी हो गयी।
और इस तरह दोनों का प्यार परवान चढ़ने लगा।
एक बार की बात है लड़की उसी पेड़ ने नीचे लड़के का इंतजार कर रही थी।
लड़का बहुत देर से आया।
उसे देखकर लड़की नाराजगी से बोली, ‘तुम इतनी देर से क्यों आए?
मेरी तो जान ही निकल गयी थी।’
यह सुनकर लडका बोला, ‘जानेमन, मैं तुमसे दूर कहां गया था, मैं तो तुम्हारे दिल में ही रहता हूं।
तुम्हें यकीन न हो तो अपने दिल से पूछ लो।’
लड़के की इस प्यारी सी बात को सुनकर लङकी अपना सारा
गुस्सा भुल गयी और वह दौड़ कर लड़के से लिपट गयी।
एक दिन दोनों लोग उसी पेड़ के नीचे बैठे बातें कर रहे थें।
लड़की पेड़ के सहारे बैठी थी अैर लड़का उसकी गोद में सर रख कर लेटा हुआ था।
तभी लड़की बोली, ”जानू, अब तुम्हारी जुदाई मुझसे बर्दाश्त नहीं होती।
तुम्हारे बिना एक पल भी मुझे 100 साल के बराबर लगता है।
तुम मुझसे शादी कर लो, नहीं तो मैं मर जाऊंगी।”
लडके ने झट से लड़की के मुंह पर अपना हाथ रख दिया और बोला, ”मेरी जान, ऐसी बात मत किया
करो, अगर तुम्हें कुछ हो गया, तो मैं कैसे जिंदा रहूंगा।”
फिर वह कुछ सोचता हुआ बोला, ”तुम चिंता मत करो, मैं जल्द ही अपने घर वालों से बात करूंगा।”
धीरे-धीरे काफी समय बीत गया।
एक दिन की बात है। दोनों लोग उसी पेड़ के नीचे बैठे हुए थे।
उस समय लड़के का चेहरा उतरा हुआ था।
लड़की के पूछने पर वह रूआंसा होकर बोला, ”जान, मैंने अपने घर वालों को बहुत समझाया, पर वे हमारी शादी के लिए तैयार नहीं हैं।
उन्होंने मेरी शादी कहीं और पक्की कर दी है” यह सुन कर लड़की का कलेजा फट पड़ा।
उसका मन हुआ कि वह जोर-जोर से रोए”लेकिन उसने
अपने जज्बात पर काबू पा लिये और बोली, ”मैंने तुमसे सच्चा प्यार किया है, मैं तुम्हें कभी भुला नहीं सकती।”
”प्लीज मुझे माफ कर देना..!” लड़का धीरे से बाेला, वैसे अगर तुम चाहो, तोअब से हम एक अच्छे दोस्त रह सकते हैं।”
लडकी यह सुन कर ज़ो-ज़ोर से रोने लगी” लड़के ने उसे समझाया और फिर दोनों लोग रोते हुए अपने- अपने घर चले गये।
देखते ही देखते लड़के की शादी का दिन आ गया।
लड़के को यकीन था कि उसकी शादी में उसकी दोस्त जरूर आएगी। पर ऐसा नहीं हुआ। हां, लड़की का भेजा हुआ एक गिफ्ट पैक उसे ज़रूर मिला।
लड़के ने कांपते हांथों से उसे खोला। उसे देखते ही वह बेहोश हो गया।
गिफ्ट पैक में और कुछ नहीं खून से लथपथ लड़की का दिल रखा हुआ था।
और साथ ही में थी एक चिट्ठी, जिसमें लिखा हुआ था- अरे पागल, अपना दिल तो लेते जा वरना अपनी पत्नी को क्या देगा ?
दोस्तो हमारी जिन्दगी का सबसे खुबसुरत एहसास प्यार ही है ।
जो हमको आपको हर किसी को होता है पर क्या हम उसको अपना पाते हैं कभी हम गलत तो कभी साथी गलत दोनो सही तो घरवाले गलत पर क्या प्यार गलत होता है नही”तो”मित्रों प्यार करो लेकिन खिलवाङ मत करो ।

 

पत्नी ने लिया पति का जाँच

एक औरत को शादी के कई साल बाद ख्याल आया कि अगर वो अपने पति को छोड़ के चली जाए तो वो कैसा महसूस करेगा।
ये विचार आते ही उसने एक कागज लिया और उसपे लिखा ,”अब मै तुम्हारे साथ और नहीं रह सकती,मै उब गयी हु तुम्हारे साथ से,मै घर छोड़ के जा रही हु हमेशा के लिए।”
उस पत्र को उसने टेबल पे रखा और जब पति के आने का टाइम हुआ तो उसकी प्रतिकिरया देखने के लिए बेड के निचे छुप गयी।
पति आया और उसने टेबल पे रखा पत्र पढ़ा। कुछ देर की चुप्पी के बाद उसने पत्र के निचे कुछ लिखा।
फिर वो खुशी की सिटी बजाने लगा,गीत गाने लगा,डांस करने लगा और कपडे बदलने लगा,इसी दौरान उसने अपने फोन से किसी को फोन लगाया और कहा ” ।
आज मै एकदम मुक्त हो गया,शायद मेरी मुर्ख पत्नी को समझ आ गया की वो मेरे लायक ही नहीं थी ।
आज वो घर से हमेशा के लिए चली गयी,अब मै आजाद हु तुमसे मिलने के लिए,मै आ रहा हु कपडे बदल कर तुम्हारे पास,तुम तैयार हो के मेरे घर के सामने वाले पार्क में आ जाओ अभी” ।
कपडे बदल कर पति बाहर निकल गया, आंसू भरी आँखों से पत्नी बेड के निचे से निकली और कांपते हाथो से पत्र के निचे लिखी लाइन पढ़ी जिसमे लिखा था….।
बेड के नीचे से पैर दिख रहे है बावली. पार्क के पास वाली दुकान से सिगरेट ले के आ रहा हु तब तक चाय बना ले ।

 

प्यार का कोई मोल नहीं

ये कहानी है उस लड़के और लड़की की जो अपने प्यार के सहारे अपनी सारी खुशियाँ एक साथ बाँट रहे और उन्हे दुगना कर रहे और अपने गम बांटकर उन्हे कम कर रहे।
इस कहानी में अनिरुद्ध नाम का लड़का है और प्रिया नाम की एक लड़की है अनिरुद्ध बड़ा ही सीधा-साधा लड़का है ।
अनिरुद्ध के लिए उसका परिवार ही सब कुछ है। अनिरुद्ध अपने परिवार के लिए कुछ भी कर सकता है । इसलिए वह दिन रात मेहनत करता है और दिन-रात मन लगाकर पढ़ाई करता है साथ ही साथ कुछ काम करता है जिसे कुछ पैसे कमा सके। अनिरुद्ध दिन-रात इसलिए मेहनत करता है ताकि वह पढ़ लिखकर कुछ कर सके बड़ा आदमी बन सके और अपने परिवार का नाम रोशन करें अनिरुद्ध की यही ख्वाहिश थी की अपने मां-बाप को वह खुशी दे सके जिसके वह हकदार है।
अनिरुद्ध इंजीनियरिंग करता है साथ ही साथ वह पार्ट टाइम जॉब भी करता है। अनिरुद्ध चाहता है कि वह बहुत बड़ा आदमी बने। उसे अपने करियर में सक्सेस मिले। ताकि आगे चलकर उससे उसके परिवार को किसी भी तरह की मुसीबत का सामना ना करना पड़े।
अनिरुद्ध रोज की तरह अपने ऑफिस जा रहा रहता है वहां आज उसके ऑफिस में एक प्रिया नाम की लड़की ने न्यू जॉइनिंग की होती है प्रिया को देखते ही अनिरुद्ध को उससे प्यार हो जाता है पहली नजर वाला प्यार। प्रिया भी अनिरूद्ध की तरह ही सीधी-साधी लड़की होती है जिसके लिए उसका परिवार और उसका फ्यूचर ही सब कुछ है वह अपने मां-बाप का हाथ बटाने के लिए पढ़ाई के साथ-साथ पार्ट टाइम जॉब भी करती हैं। प्रिया लेकिन अनिरुद्ध से थोड़ी सी अलग है।
अनिरुद्ध अपने मां-बाप के कहने पर चलता है जैसा वह कहते हैं वह वैसे ही करता है लेकिन प्रिया अपने सपनों को जीना चाहती है वह अपने सपने पूरे करना चाहती है उसका जो दिल चाहता है वह वही करती है उसने कभी दुनिया की फिक्र नहीं की। लेकिन उसके परिवार की पुरानी सोच उसके सपनों के आड़े आ गई इसलिए प्रिया अपने सपने अब तक जी नहीं पा रही थी। पर उसके मन में अभी आशा जगी हुई थी उसका भगवान में भी काफी विश्वास था उसे यकीन था कि एक न एक दिन उसके सपने जरूर पूरे होंगे जब अनिरुद्ध और प्रिया की पहली मुलाकात हुई अनिरुद्ध उसे अपना दिल दे बैठा। उस दिन से दोनों में दोस्ती हो गई।
प्रिया को अनिरुद्ध का स्वभाव अच्छा लगने लगा अनिरुद्ध हर वक्त उससे बात करता उसका छोटी छोटी चीजों में मदद करता हर वक्त उसका ख्याल रखना हमेशा उसे पूछना की उसने खाना खाया कि नहीं।
धीरे-धीरे प्रिया भी अनिरुद्ध को पसंद करने लगी थी।
फिर एक दिन अनिरुद्ध ने प्रिया से अपने प्यार का इजहार किया और प्रिया ने भी हां कह दी क्यूंकि प्रिया को भी प्यार चाहिए था वह हमेशा अकेली थी अंदर से उसे कभी इतना प्यार नहीं मिला किसी से और ना ही किसी ने कभी उसकी परवाह की अनिरुद्ध का ऐसा स्वभाव प्यार भरा और परवाह करने वाला देखकर प्रिया ने उसके प्यार को कुबूल किया और अपने प्यार का भी इजहार किया इसी तरह दोनों एक साथ घूमते मिलते एक दूसरे से बातें करते और अपने प्यार के खुशियों के पल समेट ते रहे। प्यार में मीठी तकरार तो होती है इनके बीच की तकरार हुई पर इन्होंने एक दूसरे को समझा एक दूसरे को संभाला और हमेशा एक दूसरे का साथ दिया।
अनिरुद्ध और प्रिया दोनों एक साथ कॉलेज जाते हैं एक साथ काम पर जाते जहां जाते हैं हमेशा एक दूसरे के साथ रहते।
इसी तरह खट्टी मीठी यादों के साथ दोनों ने एक साथ 4 साल गुजारे साथ ही साथ प्रिया इंजीनियर बन गया जिसकी काफी अच्छी नौकरी है और प्रिया भी एक राइटर बन गई साथ ही साथ वह अच्छा गाना भी गाती है अनिरुद्ध ने उसका सपना भी पूरा करने में मदद की गाना गाने का और अपनी आवाज को लोगों तक पहुंचाने का।
इतना समय साथ गुजारने के बाद दोनों के बीच में प्यार बहुत गहरा हो गया दोनों एक दूसरे के बिना अब जी नहीं सकते थे।
दोनों एक दूसरे के दिल की धड़कन बन चुके थे दोनों ने सोचा कि वह अब अपने अपने परिवार वालों को उनके रिश्ते के बारे में बताएंगे।
जब दोनों ने यह बात अपने घर में बताइ तब दोनों के ही परिवार वालों ने इस रिश्ते से इंकार कर दिया इनके दोनों एक कास्ट के नहीं थे दोनों अलग-अलग कास्ट के थे उनके परिवार वालों को यह मंजूर नहीं था कि उनके बच्चे उनके खिलाफ जाकर बिरादरी के खिलाफ जाकर अपनी कास्ट के खिलाफ जाकर किसी और से शादी करें।
उन दोनों के परिवार वालो ने उनका मिलना फ़ोन पे बात करना सब बंद करा दिया।
दोनो एक दूसरे के बिना रह नहीं पा रहे थे दोनों एक दूसरे की याद मैं तड़प रहे थी। दोनों एक दूसरे को मिलने के लिए बैचैन थी।
अनिरुद्ध जो अपने परिवार की इतनी इज़्ज़त करता है उनके लिए कुछ भी कर सकता है उन्हें कभी दुखी नहीं देख सकट। अपने परिवार की खातिर उसने प्रिया को भूलने का फैसला कर लिया। प्रिया को अपने प्यार और भगवन पे पूरा भरोसा त।उससे यकीं था की वह एक न एक दिन ज़रूर अनिरुद्ध के साथ होगी। इस्लिये उसने कभी हिम्मत नहीं हारी। उसने बहुत कुछ किया अनिरुद्ध को पाने क लिए रोज़ सुबह शाम वो भगवान् से प्रार्थना करती।
रोज़ अपने माँ बाप से कहती की उसने कभी भी उनकी कोई बात नहीं ताली किसी चीज़ के लिए उसने ना नहीं कहा बस अपनी ज़िन्दगी का फैसला वो खुद करना चाहती थी क्यूंकि वो जानती थी की उसकी ख़ुशी अनिरुद्ध के साथ है और कि
सके साथ नहीं।
प्रिया अकेले ही अपने प्यार के लिए लड़ी उम्मीद कायम रखी भगवन पे भरोसा रखा और एक दिन उसके परिवार वाले मान गए काफी कुछ प्रिया ने सहा काफी गिले शिकवे हुए नाराज़गी हुई लेकिन आखिर मैं सच्चे प्यार की जीत हुई ।
किसी तरह अनिरुद्ध को भी प्रिया ने मन लिया उन दोनों के प्यार के वास्ते और उनके साथ को देखकर उनके परिवार वाले राज़ी होगये इस रिश्ते के लिये। दोनों अलग कास्टे के होने के वजह से दोनों के परिवारों को समाज का डर था की लोग क्या कहेंगे ।
लेकिन अनिरुद्ध और प्रिया को किसी चीज़ की परवाह नहीं थी।
दोनों ये बात अब समाज चुके थे की उनके प्यार के सामने कोई चीज़ बड़ी नहीं वो अपने प्यार के सहारे कोई भी लड़ाई लड़ सकते हैं और जीत सकते है।
आज के ज़माने मैं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अब भी जात पात ऊंच नीच को मानते है।
पर इस कहानी से हमें यही सीखने मिलता है की प्यार की कोई जात नहीं होती प्यार का कोई धरम नहीं होता प्यार तो प्यार होता है जिसके सहारे ज़िन्दगी ख़ुशी से जी सकते है।

 

एक झूठ

आप सोचते होंगे एक झूठ क्यों कहा, क्या है अगर एक झूठ कह दिया तो, एक झूठ तो हर कोई कहता है उसमे क्या हुआ ?
तो आज मैं जो कहानी बताऊंगा उसमे आप खुद ही समझ जाओगे क्या था एक झूठ और उससे क्या फर्क पड़ा जिंदगी में, और क्या हुआ एक झूठ से ।
यह कहानी निशांत नाम के व्यक्ति और उसका परिवार की है, जिसका एक हँसता-खेलता परिवार था।परिवार में माँ, पिताजी, एक बड़ा भाई, बड़े भाई की बीवी, निशांत की बीवी रहती थी।
निशांत के पिताजी का एक बिज़नस था जहाँ दोनों भाई मिल के काम करते थे। दिन अच्छा चल रहा था, बिज़नस में भी तरक्की हो रही थी, सब कुछ अच्छा चल रहा था उस परिवार का।
सुबह उठना, सबका एक साथ बैठ के चाय-नाश्ता करना, निशांत की बीवी सबसे छोटी थी घर में तो सारा काम वो संभालती थी। सुबह उठ के चाय बनाना, सब के लिए नाश्ता बनाना, फिर निशांत को ऑफिस जाना रहता है तो उसके लिए ऑफिस के पेपर्स सब कलेक्ट कर के रख देना, टिफ़िन बनाना फिर उस के बाद जब निशांत चले जाता ऑफिस तो वो घर का सारा काम खत्म कर के, छोटे बच्चो को ट्यूशन पढ़ाती, फिर जैसे शाम को जब सब आ जाते घर तो सबके लिए खाना बनाना, फिर सबको खाना खिला के खुद खाना फिर सोना।
तो ये थी निशांत की परिवार की रोज के काम कहिये या दिन । इसी तरह उनका परिवार हँसता-खेलता गुजरता था। निशांत को शुरू से ही विदेश जाने का बड़ा मन था, उसका सपना था कि, विदेश में एक बड़ी कंपनी में वो एक अच्छे पोस्ट पर काम करे, जिस के लिए वो परिवार का बिज़नस के साथ साथ विदेश जाने के लिए आगे का पढाई भी करता।
दिन बीतता गया और करीब 1 साल निशांत ने रोज अपना काम और पढाई दोनों करता रहा, फिर एक दिन उससे ऑफर आया विदेश के एक कंपनी ने जिसमे निशांत को उस कंपनी का मैनेजिंग डायरेक्टर के पोस्ट के लिए उसे ऑफर किया था। यह देख निशांत का ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा, और साथ ही परिवार में एक अलग ख़ुशी था, जहाँ उस परिवार का पहला व्यक्ति था जो विदेश जाने वाला था काम करने ।
इसी ख़ुशी में निशांत ने अपने सभी परिवार, दोस्त, ऑफिस के लोग सबको उसने पार्टी में आने का न्योता दिया।
फिर पार्टी की शाम हुई, जहाँ सब बहुत खुश थे, कोई नाच रहा था, तो कोई गाना गा रहा था, निशांत ये सब देख बहुत खुश हुआ, और उसकी बीवी ने घर का सारा काम, सबका वेलकम से लेकर खाने तक सब देख – रेख कर रही थी।
तभी निशांत को विदेश की कंपनी से कॉल आता है, घर में शोर होने के कारण निशांत बाहर चले जाता हैं कॉल पे बात करने करने के लिए। निशांत सबसे पेहले अपने बॉस को सुखीर्या कहता है अपने पोस्ट के लिए, लेकिन तभी उसके बॉस उससे कहते हैं, ” निशांत ई ऍम सॉरी, तुम्हे मैनेजिंग डायरेक्टर से हटाकर टीम का लीडर बनाया गया है, यह सुनकर निशांत शौक हो जाता है, और वो बॉस से पूछने लगता है, क्यों अचानक से ऐसे, यहाँ मेरे घर में मैनेजिंग डायरेक्टर बनने के खशी में पार्टी चल रही है, और आप अब मुझे कह रहे है, में एक टीम लीडर रहूँगा, बॉस ने कहा कि ये सिर्फ मेरे अकेले का फैसला नहीं हैं, सबने मिल के लिया है, में कुछ नहीं कर सकता, और ये सुनकर निशांत कॉल रख दिया बिना कुछ बोले और बिना कुछ आगे का सुने।
निशांत मानो पूरी तरह टूट गया था, उसे समझ नहीं आ रहा था वो अब क्या करें। तभी वहां निशांत की बीवी आती है, और उसे खाना खाने के लिए कहती हैं।
निशांत बीवी को कहते हुए – तुम सब खा लो में बाद में खालूंगा।
अब उसकी बीवी को क्या पता निशांत के दिल में क्या बीत रही हैं, उसकी निशांत फिर कहने लगती हैं कि आज सब यहां है सब साथ में खाएंगे चलो आप।
निशांत फिर मना कर देता है और कहता है उसे अर्जेंट ऑफिस जाना होगा, एक काम आ गया है उसका वहाँ जो उसका करना जरुरी है, ये सुनकर निशांत की बीवी पूछने लगती है, आज सब घर पे हैं तो ऐसा कोनसा काम आ गया अचानक से, उसने कहा किसी को बताना नहीं सब परेशान हो जायेंगे तुम सबको खाना खिलादो में काम खत्म कर के आऊंगा तब खा लूंगा।
ये कहकर निशांत वहाँ से निकल जाता है, अपनी गाड़ी की और, तभी निशांत की बीवी कहती है, में यहां रुकी हुए हु आप जल्दी से काम खत्म करके आना तब हम साथ में खाएंगे, निशांत उसे देख – हाँ ठीक है में जल्दी आ जाऊंगा काम कर के, ये कह के चले जाता है।
निशांत वहाँ से निकल कर सीधा शराब के दूकान पे जाता हैं, और बैठ कर शराब पीने लगता है, और यहाँ घर में सभी लोग अपने अपने घर चले जाते हैं, तभी निशांत की माँ निशांत की बीवी को कहते हुए – बहु तुम खालो निशांत अपना वहां खा लिया होगा, उसका इंतिज़ार मत करो, ये सुनके के बाद निशांत की बीवी ने कहा – “उन्हीने कहा कि वो जल्दी काम खत्म कर के आएंगे, और मैंने उन्हें कहा भी है, की मैं आपके लिए रुकी रहूंगी, आप आओगे तो दोनों साथ मिल के खाएंगे, ये सुनकर निशांत की माँ ने कहा – “ठीक हैं जैसा तुम्हें ठीक लगे, में जा रही हु सोने ” ये बोलके निशांत की माँ और बाकी सब सोने चले गए, और निशांत की बीवी वहाँ सोफे पे बैठ इंतिज़ार करने लगी निशांत की ।
रात के 3 बज गए थे, लेकिन निशांत घर नहीं आया था, और नहीं कॉल उठा रहा था।
उसकी बीवी को जिंता होने लगी और वो कॉल पे कॉल किये जा रही थी, फिर कुछ देर बाद तक कोशिश करने के बाद भी कॉल नहीं उठाया तो उसने ऑफिस में कॉल किया, जहाँ उसे पता चला की वो ऑफिस गया ही नहीं, ये सुनकर निशांत की बीवी और परेशान होने लगी, और वहाँ निशांत शराब पिए जा रहा था, जब एक वेटर ने देखा की वो लगातार कई घंटों से शराब पी रहा है, तो उसने अपने मेनेजर को कहा, फिर मेनेजर ने निशांत को सलाह दी- सर, आपने बहुत पि लिया है, और रात भी बहुत हो चुकी हैं, आपको घर जाना चाहिए, आपके परिवार वाले इंतिज़ार कर रहे होंगे “।
लेकिन निशांत होश में ना होने के कारण वो कुछ नही सुन रहा था, बस पिए जा रहा था, और कुछ देर बाद वो वही सो गया। जब मेनेजर ने उसे वहाँ सोते देखा, तो उसने वेटर से कहा- ” वो आदमी जो पि रहा था, एक अच्छे घर का लगता है, एक काम करो उसके मोबाइल से उसके घर में कॉल कर दो, वो परेशान होते रहेंगे, और उसे यहाँ से आकर ले जायेंगे।
ये सुन, वेटर ने निशांत के पॉकेट से मोबाइल निकाला, और जैसे ही स्क्रीन चालू किया, तो देखा एक नंबर से 100 से भी अधिक कॉल आ चुके थे, ये देख वेटर ने उस नंबर पे कॉल लगा दिया, और यहाँ निशांत की बीवी मोबाइल के तरफ देख रही थी की अब कॉल आएगा निशांत का, तभी निशांत का कॉल आता है, और वो तुरंत उठा के बिना कुछ सुने बोलने लगती है, “कहा हो आप ? कैसे हो ? इतने देर से कॉल कर रही थी उठा क्यों नही रहे थे ? तभी वहां से आवाज आता है – ” मैडम में वेटर बोल रहा हु, सर ने ज्यादा शराब पि ली हैं इसीलिए वो यहाँ सो गए है, आप आके यहाँ इन्हें ले जाइए। ये सुनकर निशांत की बीवी को मानों झटका सा लग गया हो, वो समझ नहीं पा रही थी, आखिर क्यों? क्यों????
निशांत की बीवी ने पिताजी, और निशांत के बड़े भाई को जगाया, और उन्हें सब कहाँ, ये सुन सब हैरान हो गए, और उसके बड़े भाई उसे लेने चले गए।
कुछ देर बाद निशांत को लेकर घर आते है, और उसे अपने कमरे में सुला देते हैं । लगभग सुबह हो गयी थी, तभी निशांत की माँ किचन जाती है सब के लिए चाय बनाने, तब वो देखती है, खाना सब पड़ा हुआ हैं । तभी वो समझ जाती है कि बहु ने खाना नहीं खाया, और पूरी रात जगी थी । वह जल्दी से नाश्ता बनाकर उस के पास ले जाती है कहती हैं,- “बहु तुमने पूरी रात कुछ नहीं खाया, और पूरी रात बैठे थे सोफा पर लो कुछ खालो और थोड़ा आराम कर लो।
ये सुन निशांत की बीवी ने कहा मुझे बूख नहीं आप सब खा लीजये और निशांत की और देखने लगी।ये देख माँ वहाँ से चले गयी। कुछ देर बाद निशांत उठता है, और वो देखता है कि वो घर में है, तो उसे सब समझ आ जाता हैं कि घर में सबको पता चल गया और कोई उसे वहाँ से लेकर आया।और सामने उसकी बीवी बैठे रहती है वो उसे कुछ कहे की, निशांत की बीवी उठकर वहाँ से चले जाती हैं।
ये देख निशांत सोचता है कि उसे शाम को मना लूंगा,फ़िलहाल ऑफिस चले जाता हूं। ये सोच निशांत तैयार होने चले जाता हैं। जब वो तैयार हो के हॉल में आता हैं, तब वो देखता है कि सारा परिवार वहाँ बैठे रहते हैं। तब निशांत सबके पास जाता है और सबको सारी बात बताता हैं, कैसे उसे पोस्ट से बदल दिया गया, और वह दुःख हो कर शराब पीने चले गया।
और निशांत सबसे माफ़ी मांगने लगता है ।घर वाले उसे कहते हुए – ” ये तूने ठीक नहीं किया, तेरे वजह से बहु पूरी रात यहाँ बैठी रही, और बुखी रही, ये इंतिज़ार में की तू आएगा और साथ बैठ वो खायेगी, और तू वहाँ बैठ शराब पी रहा था, क्या यही दिन देखने के लिए तुझे इतना पढ़ाया लिखाया इस काबिल बनाया , अगर माफ़ी मांगनी है तो बहु से मांग, कल पुरे दिन उसने काम किया, पार्टी सारा उसने संभाला, यहां तक की पूरा दिन नही खायी, ये सोचकर की तेरे साथ रात में खा लेगी और तू है कि.. ” ये कह के सब वहाँ से चले गए । निशांत ये सुनकर अपने बीवी के पास गया और सॉरी कह के, ऑफिस के लिए निकल गया । ये देख उसकी बीवी को समझ नहीं आया कुछ, की यह क्या था, बस एक सॉरी और बात खत्म, पूरा दिन जिस के लिए काम कर रही थी, बुखी रही की उसके साथ खाऊँगी, रोज सुबह उठ के चाय बनाती हूँ, नाश्ता बनाती हूँ, टिफ़िन बनाती हूँ, वोह वहाँ मुझसे झूठ बोलकर पूरी रात बैठ कर शराब पीता रहा और यहाँ में उसका इंतिज़ार कर रही थी। क्या यही प्यार था उसका ? क्या इसे प्यार कहते है ? क्या उसका पोस्ट मेरे से ज्यादा जरूर था ?
यही सब वो पूरा दिन सोचते रह गयी। देखते देखते शाम हो गयी और सब घर आ गए। निशांत आते ही – “माँ बूख लग गयी खाना निकालो जल्दी से, में कपडे बदल के आता हूं “। निशांत कपडे बदल के आके डिनर टेबल पर बैठ गया, फिर बाकी सब भी आये और खाना शुरू हुआ, खाना खाने के बाद रोज की तरह निशांत की बीवी आखिरी में खाना खाने बैठी, वो अपना खा के जब अपने रूम में गयी तो देखा निशांत सो गया था, ये देख वो और अंदर से रूठ गयी की कैसे निशांत इतना जल्दी भूल सकता है सारी बातों को ? कैसे निशांत बिना कुछ ठीक किये रह सकता है ? कैसे उसके मन में नहीं आया एक बार भी की उस रात उसकी बीवी उसका इंतिज़ार कर रही थी बुखे पेट ? क्या निशांत को कुछ फर्क नहीं पड़ता मेरे होने ना होने से ? क्या निशांत के लिए ये सब एक आम बात है ? क्या निशांत को झूठ कहना जरुरी था ? क्या में इतनी भी उसके जरुरत नहीं लगती की वो मुझे सच बता सकता था ? क्या निशांत ऐसे पहले भी झूठ कहा होगा ? कितनी बार मुझसे असेही झूठ बोल कर वो निकला होगा घर से ?
असेही कई सवाल मन में रखे पूरी रात वो सोचते रही और फिर सोचते सोचते सुबह हो गयी, फिर रोज की तरह सबके लिए चाय बनाना, नाश्ता तैयार करना, टिफ़िन देना ये सारे कामों में लग गई । वहाँ निशांत उठके रोज की तरह तैयार होके हॉल में आया । और अपने बीवी से टिफ़िन मांगने लगा ये देख उसकी बीवी सोचने लगी – क्या ये सब भूल गया इतना जल्दी? क्या इसे कुछ याद नहीं उस रात के बारे मैं ? और उसने टिफ़िन दे दिया और सब ऑफिस चले गये । सारा काम खत्म होने के बाद निशांत की बीवी अपने रूम में गयी और उसके मन में आया की यहाँ किसी ने निशांत को दुबारा कुछ नहीं कहा, यहाँ तक की में रोज उदास रहती हूँ ये देख कर भी कोई मुझसे एक बार भी नही पुछा की – ” क्या हुआ, ऐसे उदास क्यों हो? क्या निशांत ने नहीं मनाया ? कुछ भी किसी नहीं कहा । अचानक से खड़े होकर उसने अपने आप से कहा जब किसी को यहाँ मेरी जरुरत ही नहीं, जब किसी को फर्क नहीं पड़ता की निशांत ने झूठ बोलकर वहाँ शराब पीने गया, सबको अपना अपना काम दीखता है लेकिन में जो रोज अंदर हजारों सवाल लेकर बिना कोई काम रोके काम करती हूँ ये किसी को नहीं दीखता, अगर ऐसा ही हैं तो मुझे यहाँ रहने का कोई हक़ नही ।
जब किसी को फर्क नहीं पड़ता, किसी को कदर नहीं एक औरत की, वो अपना सब कुछ छोड़कर किसी के घर को सच्चे दिल से अपनाती है, और उसका अपना घर समझ कर सारा टाइम घर को सँभालने में लगा देती है, और बदले में ये उम्मीद, ये चाहत रखती है कि उसका परिवार उसके साथ दे, उसका पति को कभी उसे झूठ बोलने की जरुरत ना पड़े । क्या इतनीसी बात उम्मीद रखना गलत है ? और फिर वो फैसला कर लेती है कि वो अब उस घर में नहीं रहेगी जहां उसकी कदर नहीं । ये सोच वो अपना सामान पैक करना शुरू कर देती है। और फिर वो सारा सामान लेके हॉल में आती है, ये देख निशांत की माँ हैरान हो जाती है, और वो उससे पूछते हुए – ” क्या हुआ बहु, सब ठीक है न ? ये सब सामान लेके कहा जा रही हो ? ”
निशांत की बीवी कहते हुए – ” मुझे यहाँ ठीक नहीं लग रहा में कुछ दिनों के लिए अपने माँ – पापा के घर जा रही हूँ । ये सुन निशांत की माँ खबरा गयी, लेकिन जैसे वो और कुछ केह पाती तब तक निशांत की बीवी वहां से चले गयी । ये देख निशांत की माँ ने तुरंत निशांत को कॉल लगाया और उसे सारी बाते बताई, ये सुन निशांत को थोड़ा समझ आ गया कि उस दिन की बात को लेकर अभी तक वो नाराज हैं, उसने माँ को कहाँ -“आप टेंशन मत लो वो असेही मिलने गयी होगी, शाम को आते वक़्त में उसे लेके घर आ जाऊंगा ।
ये सुन निशांत ने कॉल रख दिया और अपने कामो में लग गया । जब शाम हुए, निशांत ऑफिस से निकल कर अपने ससुराल चला गया अपने बीवी को लाने लेकिन उसकी बीवी आने से मना कर दिया और कहने लगी – ” मुझे कुछ वक़्त चाहिए, अकेले रहना है जैसे ही में ठीक हो जाऊंगी में आ जाऊंगी वहां आप चले जाओ”, ये सुन निशांत ने अपने बीवी को मनाने की कोशिश करने लगा।
लेकिन कहते है न हर चीज़ का एक वक़्त होता है, अगर वो वक़्त निकल जाए तब आप चाहकर भी कुछ नही कर सकते, कुछ ऐसा ही यहाँ निशांत के साथ हुआ, जब बीवी घर में थी तब निशांत को एक बार भी ख्याल नहीं आया उसे मनाने का, एक बार भी ख्याल नहीं आया उससे बात करने का और आज जब वो घर से चले गई तब उसे होश आया मुझे बात करना चाहिए था ।
बहुत बनाने के बाद जब वो नहीं मानी तब निशांत ने बीवी से पुछा – तुम किस बात को लेकर नाराज हो में शराब पिया इसिलिये न, अगली बार से में नहीं पियूँगा शराब आब माफ़ कर दो और चलो घर ।
ये सुन बीवी ने कहा – ” नहीं मुझे इस बात का इतना बुरा नहीं लगा की आपने शराब पिया, मुझे उस बात का बुरा लगा की आपने मुझसे झूठ कहा, आपने मुझसे झूठ कहकर घर से गये एक बार भी आपको मेरा ख्याल नहीं आया, ना जाने आप पेहले भी कितना झूठ बोले होंगे, या आगे कितना बोलेंगे” ये सुन निशांत को गुस्सा आया और उसने कहा तुम बस एक झूठ को लेकर इतना बड़ा हंगामा कर रही हो, एक झूठ ही तो था और कोनसा में किसी लड़की के साथ था पूरी रात जो ऐसे बोल रहे हो आख़री बार कह रहा हूँ चलो घर, मेरे पास इतना वक़्त नही है कि बार बार यहाँ आके तुम्हे समझाते रहूं । ये सुन बीवी ने सीधा कहा आप जा सकते हो मेने आपको नहीं रोका है, खाना बना है खा के जाना । ये सुन गुस्से से वहां से निकल गया बिना खाये ये देख बीवी रोने लगी। वहाँ जब निशांत घर पंहुचा तब सब हॉल में बैठे थे और जैसे ही देखे निशांत आ गया, वो उससे पूछने लगे – अकेला आया ?
बहु कहाँ हैं ?
ये सुन निशांत को समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या बोले सबको, उसने फिर भी कह दिया आ जायेगी कुछ दिनों में और केहकर अपने रूम में चले गया।
फिर अगले सुबह हुई तब निशांत के पिताजी बोलने लगे – ” बहु, बहु कहा हो अभी तक चाय नहीं मिली मुझे ।”
ये सुन निशांत के माँ ने कहाँ बहु कहा है, आप भूल गए वो अपने मायके चली गयी है ।
ये सुन वो थोड़े उदास हो गए, और फिर उनकी बड़ी बहु कुछ देर बाद चाय लेके आती है। कुछ देर बाद जब नाश्ता का वक़्त होता है, तब घर में नाश्ता बना नहीं रहता है, और वहाँ निशांत को हमेशा उसकी बीवी उठती जो की अब घर में नहीं है, तो वो लेट उठता है । देखते ही देखते घर का सारा माहौल बिगड़ने लगता है । ना किसी को समय पर चाय मिलता, तो ना किसी को समय पर खाना।
उनकी बड़ी बहु जॉब करती थी तो वो भी अकेले कितना कर पाती जितना उससे होता वो कर के अपने ऑफिस चले जाती। ये देख घर के सभी लोग परेशान रहने लगे । वहाँ निशांत का सारा काम, कपडे से लेकर, लैपटॉप, पेपर्स सब उसकी बीवी लाकर देती अब वो घर पे नहीं हैं तो निशांत को सारा काम करना पड़ता, इससे निशांत और परेशान रहने लगा । वक़्त बीतता गया, वहाँ निशांत की बीवी अपने माँ – पापा का ख्याल रखने लगी, और यहाँ निशांत का घर, जो एक हँसता-खेलता परिवार था, वो धीरे – धीरे टूटने लगा था। किसी को आदत थी नहीं, कोई काम करने का, अब सबको काम करना पड़ता था। फिर जब निशांत को समझ आया की वो ज्यादा दिन नहीं रह पायेगा ऐसे तो वो फिर बीवी को मनाने चला गया अपने ससुराल । लेकिन बीवी वापस जाने के लिए मान ही नहीं रही थी ।
उसका बस एक ही बात कहना – ” मुझे अब आपपे भरोसा नहीं, आप झूठे हो और में उस इंसान पे अपनी सारी जिंदगी कुर्बान कर दू ये मुझे मेरे मम्मी – पापा ने नहीं सिखाया ” ।
तो अब जब तक मुझे यकीन नहीं हो जाता तब तक में अब उस घर नहीं आउंगी । ये सुन निशांत कहने लगा – क्या तुम एक झूठ को लेकर अब तक इतना बड़ा बात बना के रखे हो ? क्या तुम्हारे मम्मी – पापा ने ये सिखाया की अपने पति को अपने परिवार को छोड़ कर अपने मायके आ जाओ ? क्या यही प्यार है तुम्हारा ? ये इतना काम किस के लिए कर रहा हूँ ?
तुम्हारे लिए न हमारे अच्छे जिंदगी के लिए और तुम हो की एक झूठ को लेकर इतना बात बढ़ा रहे हो ?
प्लीज मान जाओ, घर चलो वापस दुबारा ऐसा नहीं होगा ।
लेकिन बीवी नहीं मानी उसने कहा जब तक मुझे मेरा दिल नहीं कहता तब तक मैं नहीं आउंगी आप चले जाओ। और हां खाना बना है खा के जाना । ये सुन वापस निशांत अपने घर के लिए निकल गया । जब वो घर पहुचने ही वाला था तभी, उसे फिरसे विदेश से कॉल आता है, वो साइड में गाडी रोक के कॉल उठता है, तब वहां बॉस उसे कहते बधाई हो निशांत तुम मैनेजिंग डायरेक्टर के लिए अप्पोइंट किये गए हो , ये सुन निशांत खुश नहीं होता और बॉस को कहने लगता- “क्या सर इसबार फिर मुझे हाँ बोल के ना बोल दोगे ? आपके उस दिन के वजह से यहाँ मेरी जिंदगी बर्बाद हो गयी है और आप मुझे ये बोल रहे हो।” ये सुन बॉस ने कहा – मुझे नही पता निशांत तुम्हारे निजी जीवन में क्या हुआ है, उस दिन जब मैने कहा कि तुम्हारा पोस्ट बदल दिया जाता है, वो मेरा अकेले का बात नहीं था, पुरे टीम मिल के तय किया था, और उसके पीछे का भी वजह है, वजह ये है कि तुम्हारा जो प्रोजेक्ट था जो तुमने हमे दिया था वो पूरा नहीं भेजा था, जिस के वजह से तुम्हारा पोस्ट बदलना पड़ा, में तुम्हे आगे बता ही रहा था कि तुमने उस वक़्त कॉल कट कर दिया ।
यह सुन निशांत अपना लैपटॉप ओपन किया और चेक करने लगा, तब उसे पता चला की पार्टी की ख़ुशी में उसने पूरा काम खत्म ही नहीं किया था और उसने बिना कुछ देखे बॉस को दे दिया था । ये देख निशांत ने बॉस को सॉरी कहा और माफ़ी मांगी । और फिर पूछा की सर लेकिन अभी फिर से वो पोस्ट कैसे दिया मुझे ? मैंने तो आगे कोई काम ही नहीं किया, फिर कैसे अभी मिला मुझे ?
फिर बॉस ने कहा – ” वो जो आधा काम रह गया था प्रोजेक्ट में वो तुम्हारी बीवी ने कम्पलीट कर के मुझे मेल कर दिया , जिसे देख सारे टीम मेंबर बहुत खुश हुए और तुम्हे फिरसे पोस्ट दे दिया गया। ये सुन निशांत हैरान रह गया और वो सर को थैंक्यू बोल, बाद में बात करता हूँ सर ये बोल के कॉल कट कर दिया । और निशांत बहुत रोने लगा, रोते गया .. जिस बीवी को वो टाइम नहीं देता था, उसे झूठ कहकर चला गया, हमेशा वो घर के काम करती रही लेकिन एक बार भी उसने उससे पूछना जरुरी नहीं समझा की कैसे हो? लाओ में कर देता हूँ काम, या आराम कर लो बाद में कर लेना, हमेशा उसे गलत समझ रहा था, और आज वही बीवी ने उसके झूठ बोलने पर भी, घर छोड़ने पर भी, पूरी रात उसे बुखा रखने तक लेके रोज घर के सुबह से शाम तक काम कराने पर भी, उसने अपने पति का काम किया उसे जरुरी समझा, और वो भले मायके में थी लेकिन काम अपने पति का कर रही थी वहां रहकर भी ताकि उसके पति का विदेश जाने का सपना, मैनेजिंग डायरेक्टर का पोस्ट जी उसके पति, और उसके परिवार का सपना था वो पूरा हो सके ।
जब वो अपने घर पंहुचा तब माँ ने देखा की निशांत के आँखों में आसूं तब माँ ने पुछा – “क्या हुआ निशांत तू रो रहा है ?
निशांत ने कहा माँ में बहुत बुरा हूँ, इतना बुरा की में किसी ने नजरे भी नहीं मिला सकता, खासकर अपने बीवी से “।
ये सुन माँ ने बोली – बेटा हम औरते भले ही कुछ कहते न हो जताते ना हो इसका मतलब ये नहीं की हम इंसान नहीं, हमारे में कोई दिल नहीं, हमे जीने का हक़ नहीं, हमे अपने पूरे सपने करने का हक़ नहीं, आज तक कभीं पुछा अपने बीवी से उसे क्या पसंद है, उसका कोई सपना है, उसकी कोई खुवासिश है जो अधूरी है, एक बार भी बेटा तूने अपने माँ से कहा माँ तुम आज रहने दो में काम कर देता हूँ ।
बेटा निशांत सब कुछ पैसा ही नहीं होता, सारे सपने सिर्फ तुम्हारे ही नहीं होते, तुम्हारे पास जो अपना सब कुछ छोड़कर आयी है उसके भी रहते है । सिर्फ ऊँचा उड़ना मत सीखो, बल्कि साथ में अपने परिवार को भी ऊंचा उड़ाना सिखाओ जो तुम्हारे लिए अपना सब कुछ छोड़कर आते है । मेरा क्या है, मेरी तो उम्र हो गई है, अभी भी वक़्त है संभल जाओ।
ये सुन निशांत अपने माँ के पैरों पर गिर गया और उनसे माफ़ी मांगने लगा। साथ ही वहाँ खड़े उसके बड़े भाई और पिताजी भी रोने लगे। तभी माँ ने निशांत को कहा -” उठ जा बेटा उठ जा, जा और मेरी बहु को कुछ भी कर के ले आ बहुत याद आ रही है उसकी । ये सुन निशांत रोते रोते अपने ससुराल पहुचा और अपने बीवी के सामने गिर गया तभी बीवी देख – क्या हुआ निशांत ? आप रो क्यू रहे हो ?
सब ठीक है न वहाँ ? तुम्हें कुछ हुआ तो नहीं ?
कुछ बोलो निशांत , मुझे डर लग रहा है,” तभी निशांत का रोते रोते कहना -” जरूर पिछले जनम में कुछ अच्छा काम किया रहेगा तो जा के इस जनम में तुम मिले, जो अभी भी मेरी और मेरे परिवार के बारे में पूछ रही है, सोच रही है, क्यों हो तुम ऐसे, क्यों तुम मुझसे इतना प्यार करते हो ?
में लायक नहीं हूं तुम्हारे प्यार के मुझे मारो, मारो मुझे
ये सुन बीवी के आंखो में आसूं आते बोली – निशांत मेरे तो सब कुछ आपसे शुरू होता है और आपपे ही खत्म, ऐसे कैसे आप मुझे बोल रहे हो मारो, मर जाऊंगी लेकिन कभी आपको कुछ होने नहीं दूंगी।
ये सुन निशांत बीवी को अपने बाहों में ले लिया और रोने लगा। कुछ देर बाद बीवी ने कहा कि खाना रखा है खालो चलो, जब निशांत खाने बैठा तो वो देखा जो भी कुछ बना था सब उसके पसंद का बना था ये देख वो फिरसे रो पड़ा और पूछने लगा, बीवी क्या है ये, तुम्हे पता था में फिरसे आऊंगा आज ?
बीवी हसँ के बोली नहीं में तो रोज आपके पसंद का खाना बना के रखती हूं ताकि आप जभी आओ आपको आपके पसंद का खाना खिला सकू, आप जभी भी आते में रोज बोलती खाना खा के जाना, लेकिन आपने कभी खाया ही नहीं। तब निशांत को समझा की हमेसा बोलने का कारन ये था कि बीवी हमेसा मेरे लिए मेरे पसंद का खाना बना के रखती थी। ये सोच निशांत के आसूं रुके नही जा रहे थे, वो फिर बीवी को अपने पास बिठाया और अपने हाथों से उसे खाना खिलाया और बाद में उसने खुद खाया, इतना ही नहीं जब खाना हो गया तो सारा बर्तन उसने उठके भी रखा।
ये देख बीवी रोने लगी और जैसे ही कुछ कहने जाती की निशांत ने उसे चुप करते हुए कहा, शांत आजसे और अभिसे तुम्हारे आँखों में एक आसूं नहीं आने दूंगा। और वहां बैठ गया,कुछ देर बाद बीवी ने कहा-“घर नहीं जाओगे ? तब निशांत हँसते हुई – ” जहाँ मेरी बीवी हो वही मेरा घर है ” ये सुन उसके चेहरे पर हँसी आगयी और अपने रूम में चले गयी। कुछ देर बाद सारा सामान के साथ रूम से बाहर निकल कर कहने लगी – ” चलो निशांत मुझे वो वाला घर जाना है अब, अब मुझे वहाँ लें चलो” . ये सुन निशांत जल्दी से उठा और गाडी में सामान रख दिया, और फिर बीवी के लिए कार का दरवाजा ओपन किया और कहा – ” बैठिये मैडम ” ये सुन बीवी हँसकर कार में बैठ गयी और थोड़ी दूर जा के निशांत गाडी रोक लेता है।
ओर फिर बीवी को बाहर निकलने के लिए कहता है, जैसे ही वो बाहर निकलती है, वो देखती है निशांत वहाँ आइसक्रीम ले रहा होता है, फिर दोनों एक दूसरे को देखते आइसक्रीम खाते रहते है।
कुछ देर बाद दोनों घर पहुचते है तो देखते सब घर वाले जगे रहते है, और दोनों के लिए एक केक रखा रहता है, ये देख दोनों खुश हो जाते है और केक काटकर एक दूसरे को खिलाने लगते है।कुछ देर बाद निशांत और उसके बड़े भाई दोनों मिल के सबके सामने कहते हुए – ” अब से हर हफ्ते में दो दिन हम भाई मिल के खाना बनाएंगे और वो दिन आप सभी को आराम करना होगा।
ये सुन सब हँसने लगते है और माँ दोनों बेटो के सर पे हाथ रख आशीर्वाद देते हुए – ” आज मुझे मेरा परिवार फिरसे मिल गया ।”
इसतरह निशांत की हँसता-खेलता परिवार जो निशांत के एक झूठ से टूट गया था, वो फिरसे जुड़ गया।
तो ये था एक झूठ की ताकत जो एक हँसते – खेलते परिवार को तोड़ के रख दिया था ।
और ये था एक औरत और एक प्यार की ताकत जिसे अगर आप नहीं समझेंगे, ख्याल रखेंगे तो आपका हँसता खेलता जीवन बर्बाद हो जायेगा। आखिर कार निशांत की जीवन से जो ख़ुशी चले गयी थी वो उसे वापस मिल गयी ।

 

अमन-राधिका की अनोखा प्रेम कहानी

नाम सुन के क्या लगता हैं आपको ? प्यार का एहसास क्या होता हैं। तो चलिए आज हम आपको बताते हैं प्यार का एहसास का मतलब क्या होता हैं।
ये कहानी एक रईस परिवार की लड़की जिसका नाम राधिका है और दूसरी और एक मध्यम परिवार का लड़का जिसका नाम अमन हैं। दोनों एक दूसरे से बहुत अलग हैं लेकिन क्या उन्हें एक दूसरे से प्यार हो पायेगा चलिए जान लीजिये आप खुद ही।
राधिका बचपन से एक आलिशान घर, गाडी, और रहन-सहन में पली बड़ी है।
वही अमन बचपन से अपने परिवार को संघर्ष करता देख बड़े होते होते उससे अपने जिम्मेदारी का एहसास होने लगा।
ज्यादा पैसे न होने के कारन से वो ज्यादा पढ़-लिख ना सका , वही दूसरी और सब कुछ होने के बाद भी राधिका को पढ़ने – लिखने का मन ना होने के कारन पढ़ ना सकी। वक़्त के साथ साथ दोनों बड़े हुए अपने अपने रहन-सहन से।
एक और अमन एक छोटे से कार कंपनी में काम करने लगा। वही दूसरी और राधिका अपने जिंदगी घूमने मस्ती में बिताने लगी। एक दिन आया जब दोनों का एक दूसरे से सामना हुआ, वो कुछ इस तरह हुआ की एक दिन अमन एक कार को टेस्टिंग करने निकला था, वही राधिका अपने दोस्तों के साथ कार में घूमने निकली थी। थोड़ी दूर जा के राधिका की गाडी ख़राब हो गयी और उसी वक़्त अमन ने देखा की कोई वहा लिफ्ट मांगते हाथ दिखा रहा हैं।
अमन गाडी साइड में कर उतर के राधिका की और गया फिर क्या राधिका उससे देख पूछने लगी – “क्या आप हमे थोड़ी दूर तक छोड़ सकते हैं ? ” अमन उसकी बातों को सुन के चुप चाप गाडी की और गया और गाडी चेक करने लगा।
ये देख राधिका को अच्छा नहीं लगा की वो किसी से पूछ रही है और अमन जवाब नहीं दे रहा। अमन कुछ देर बाद बिना किसी से कुछ कहे चले जाता है। ये देख राधिका को कुछ समझ नहीं आया तभी पीछे से आवाज आते हुए – ” राधिका गाडी चालू हो गयी अंदर आजा ” ये सुन राधिका उससे सुक्रिया करने जाती तब तक अमन निकल चूका था। राधिका फिर गाडी में बैठ चले गयी।
एक दिन आया जब राधिका का जन्मदिन था वो हर साल की तरह अपने परिवार के साथ मंदिर गयी वहा उसने अमन को फिरसे देखा वो देखते ही उसके पास गयी उससे उस दिन के लिए सुक्रिया कहने, ये सुन अमन ने उससे देख मुस्कुरा दिया। ये देख राधिका ने अमन से पुछा – ” क्या तुम बोल नहीं सकते ? उस दिन भी मैंने पुछा था तब भी कुछ नहीं बोले आज भी जब मैं खुद आयी तुम्हारे पास तुम्हे सुक्रिया कहने तोह आज भी बस मुस्कुरा दिए और कुछ कहा नहीं।
फिर अमन ने कहा की मुझे देर हो रही थी लेकिन मैंने वहां तुम्हे देखा की तुम लिफ्ट मांग रहे थे इसीलिए मैंने गाडी रोक के तुम्हारी गाडी ठीक करने चले आया।
फिर दोनों के बीच बाते चलने लगी फिर अमन को देर हो रही थी तो अमन ने कहा की अब मुझे जाना होगा मुझे ऑफिस के लिए लेट हो रहा है। जाते जाते अमन ने उससे दोस्ती की हाथ बढ़ाया कहा की क्या हम दोस्त बन सकते है ये सुन राधिका ने कहा – ” मुझसे दोस्ती ? में हर किसी से दोस्ती नहीं करती। ये सुन अमन ने हस्ते हुए कहा – ” चलो ठीक है कोई नहीं वक़्त बताएगा की दोस्ती करते हो या नहीं आप।
ये बोल के वो चल दिया और वहा राधिका भी अपने घर की और निकल पड़ी।
कुछ दिनों बाद राधिका और अमन एक मॉल में मिलते है, अमन देख राधिका से पुछा – ” तुम यहां कैसे ? राधिका देखते हुए -” बस युही घूमने के लिए आयी हु तुम्हारा आज ऑफिस नहीं है जो यहां आये हुए हो ? अमन ने कहा आज बस जल्दी काम खत्म हो गया था तो सोचा थोड़ा घूम लू। फिर दोनों एक कैफ़े में गए और बाते करने लगे।
राधिका ने अमन से कहा – ” अपने बारे में बताओगे कुछ ?
अमन हस्ते हुए कहने लगा – ” में क्या बताऊ अपने बारे में मेरा तो बस एक साधा जिंदगी है जहाँ रोज सुबह ऑफिस जाता हूँ और शाम को घर जा के घर का कुछ काम कर लेता हूँ बस फिर खा के सो जाना फिर वही सुबह फिरसे।
फिर अमन ने पुछा आप क्या करते हो ये सुन राधिका हसने लगी और कहा -” मुझे कुछ करने की जरुरत ही नहीं पड़ती सब बिना कुछ किये ही मिल जाता हैं तो क्यों करुँगी में कुछ।
फिर अमन ने कहा अच्छा हैं फिर तो हम बहुत अलग हुए।
ये सुन राधिका ने कहा हां अलग तो हुए हम फिर भी तुम्हारे साथ बैठी हूँ यहां। फिर अमन ने कहा बैठी हु मतलब हम अलग है तोह सिर्फ रहन-सहन से बाकी हम दोनों एक ही है। अगर तुम दिल से किसी के बारे में सोचोगे तोह तुम्हे कोई अलग नजर नहीं आएगा। ये सुन राधिका ने कहा ये दिल कुछ नहीं होता हैं। अमन सुन के मुस्कुराने लगा और कहा ठीक है जैसा तुम बोलो। फिर हर कुछ दिनों में दोनों मिलते रहते बाते करते और अपने घर चले जाते।
धीरे-धीरे दोनों में बाते बढ़ने लगी और दोनों रोज मिलने लगे।
अमन ऑफिस से निकल के मॉल चले जाता और वहां राधिका उसका इंतिज़ार करती रहती। फिर एक दिन राधिका ने कहा की मुझे एक पूरा दिन तुम्हारे साथ रहना है देखना है की क्या करते हो तुम पूरा दिन। फिर एक दिन अमन का छुट्टी था ऑफिस का तोह उसने राधिका को मिलने के लिए बुला लिया।
फिर अमन हमेसा कीतरह पहले मंदिर गया फिर वहा से आने के बाद मैदान गया जहां छोटे-छोटे बच्चे खेल रहे थे वहां अमन उनके साथ खेलने लगा फिर कुछ देर बाद अमन वहां से आश्रम गया जहां वो हमेसा लोगो को खाना खिलता उनका कुछ देर देख भाल करता फिर चले आता फिर वहा से निकलने के बाद अपने घर आया और अपने माँ को बिठा के घर का बचा हुआ काम खत्म किया फिर रात हो गयी और
उसने राधिका को घर छोड़ आया और कहा – ” ये रहता है मेरा छुट्टी का दिन और यही है मेरी आम जिंदगी जहां जितना हो पता है उतना में करने की कोशिश करता हु।
ये सुन राधिका बिना कुछ कहे चले गयी और पूरी रात सोचते रही ऐसे भी लोग होते है जहां अपना छोड़ दूसरे के बारे में इतना सोचते है और एक में हु जो आज तक अपने माँ-पापा की मदत तो दूर आज तक पुछा भी नहीं की वो कैसे हैं ? वो करते क्या है ? ये सब सोच राधिका भावुक हो गई और अपने माँ के पास चले गयी उसने देखा माँ उसकी काम कर रही होती है जैसे ही वो माँ पुकारती है माँ वहां से – ” क्या हुआ कुछ चाहिए तुम्हे बोलो ? ”
ये सुन राधिका और भावुक हो गयी और माँ को कहते हुए नहीं कुछ नहीं बस युही आयी थी और वहां से चले गयी।
बस वो एक पल था जब राधिका को एहसास हुआ की सच में दिल से सोचने वाले लोग होते हैं। फिर क्या मानो राधिका की दुनिया ही बदल गयी अगली सुबह वो पापा के पास गयी और कहने लगी आज से में भी आपके साथ ऑफिस जाउंगी मुझे भी आपके काम का बोज उठाना है ये सुन पापा सोच में रह गए की क्या हो गया मेरी बेटी को आज इतने सालो बाद अचानक से ये ख्याल कैसे आया और अंदर ही अंदर खुश भी हो रहे थे की उनकी बेटी अब बड़ी हो रही है, अपने जिम्मेदारी समझने की काबिल बन गयी है।
बस फिर शाम को हमेसा की तरह वो अमन से मिलने चले गयी बस फर्क इतना था आज की हमेसा वो घर से आती थी आज वो ऑफिस से आयी है।
ये देख अमन को खुसी हुए और उसने राधिका से पुछा – तो दिलो होता है न ?
ये सुन राधिका हसने लगी और उससे माफ़ी मांगते हुए उससे फिरसे सुक्रिया कहा की उसके वजह से आज वो अपने आप को पहचान पायी की उसकी जिंदगी जिंदगी क्या थी और वो किसे समझ बैठी थी।
तो अब आगे क्या बताऊ आपको, आगे का तो आपको समझ आ गया होगा क्या हुआ रहेगा।
हर कहानी की तरह दोनों को अंत में एक दूसरे से प्यार हो गया और दोनों एक दूसरे के साथ रहने लगे। अमन को एक साथी की जरुरत थी जो उसे समझे, प्यार करे और राधिका को सचाई की, एक जिम्मेदारी की जरुरत थी जो उससे अमन ने दिखा दिया।
जाते जाते में आपको एक बात बताना ही भूल गया, दोनों एक दूसरे से मिले, बाते किये, घूमने, रहे एक दूसरे एक साथ लेकिन अभी तक दोनों ने एक दूसरे से अपना नाम नहीं पुछा। ना अमन ने कभी पुछा की आपका नाम क्या हैं और नाही राधिका ने अमन से कभी उसका नाम पुछा।
तो इस कहानी का अर्थ यही था की किसी की पहचान जानना या पूछना जरुरी नहीं। जरुरी बस यह है की आप बिना जाने कितना उसपे यकीन करते हो और उसकी मदत करते हो। राधिका एक ऐसी लड़की थी जिसे हमेसा से घूमना, मस्ती करना, ये सब में अच्छा लगता और अमन एक ऐसा लड़का था जिसे हमेसा से उसकी जिम्मेदारी उसे पकड़ी रहती। दोनों एक दूसरे से काफी अलग थे लेकिन अंत वही एक दूसरे के लिए बन गए।
तो प्यार कभी भी और किसी से भी हो जाता है, आपको ना उस के लिए अपनी जिम्मेदारी से भटकना है और नाही उस के लिए कुर्बानी देनी है।

 

तेरे बिन

क्या ऐसा हो सकता है कोई इंसान दुबारा किसी से प्यार कर सकता है ?
दोबारा किसी से मोहब्बत हो सकती है ?
इसका जवाब शायद किसी के लिए हाँ होगा तो किसी के लिये ना !
यह एक कहानी है ये निशा नाम की लड़की की जो अमर नाम क लड़के से बहुत प्यार करती है ।
दोनो कॉलेज के वक़्त से एक दूसरे एक दोस्त थे निशा और अमर एक दूसरे को बहुत अच्छी तरह से समजते थी । दोनो एक दूसरे के काफी अच्छे दोस्त थे ।
निशा और अमर हर मुश्किल वक़्त मैं एक दूसरे का साथ देते थी । ओर ख़ुशी के मौके पर भी वो एक दूसरे के साथ होते थी
जब कभी अमर को कोई मुश्किल होती तो निशा हर हाल मैं उसका साथ देती थी ।
इसी तरह जब कभी निशा को मुश्किल का सामना करता पड़ता तब अमर उसके साथ होता और इसी तरह ये दोनों एक दूसरे का साथ निभाते गए और दोनों के बीच मैं मोहब्बत हो गायी।
वक्त के साथ साथ दोनों की मोहोब्बत काफी गेहरी होती गायी ।
कुछ समय बाद दोनों की कॉलेज की पढाई ख़तम होगयी और अमर और निशा दोनों ने ही अछि जॉब ज्वाइन कर ली और इनकी ज़िन्दगी सही से ख़ुशी से गुज़र रही थी ।
पहिर एक दिन निशा ने अमर से कहा की “अमर अब हमें शादी कर लेनी चहिये” ।
अमर ने ये बात सुनकर कहा की “थिक है निशा मैं आज ही अपने घरवालों से बात करता हूँ और तुम भी अपने घरवालों से बात करलो” दोनों ने अपने घरवालों से बात की दोनों के परिवार वाले एक दूसरे से मिले दोनों के परिवारवालों को ये रिश्ता पसंद आया और दोनों ने हाँ कह दी ।
इस रिश्ते के लिए कुछ समय बाद का ही दोनों की सगाई का महूरत निकला और कुछ ही दिनों में दोनों की सगाई काफी धूमधाम से की गयी । कुछ दिनों बाद अमर ने अपनी कंपनी स्टार्ट की जिसमे निशा भी साथ थी दोनों एक साथ अपनी नयी कंपनी को अछेसे चलने लगे कुछ ही समय मैं दोनों की कंपनी ने ाचा बिज़नेस किया ाचा प्रॉफिट किया एक दिन अमर को बिज़नेस के सिलसिले मैं किसी दूसरे शहर जाना पड़ा वहां उसकी मुलाकात प्रेम से होती है दोनों बिज़नेस मीटिंग अटेंड करने के बाद बिज़नेस पार्टी अटेंड करते हैं ।
श पार्टी मैं अमर और प्रेम की अछि दोस्ती होजाती है उस वक़्त दोनों एक दूसरे को अपनी लाइफ की बातें शेयर करते हैं और दोनों हमेशा अपनी दोस्ती निभाए रखने का वादा करते है । जब अमर अपनी गाडी मैं घर जा रहा था तब रास्ते मैं उसका एक्सीडेंट प्रेम की गाडी से होजाता है प्रेम ये हादसा बर्दाश्त नै कर पाया ।
जाब निशा को और अमर के घर वालों को ये बात पता चलती है की अमर का एक्सीडेंट होगया है और वह इस दुनिया मैं नहीं रहा तो वो लोग ये सदमा बर्दाश्त नहीं कर सक पर निशा को ये नहीं पता था की अमर का एक्सीडेंट प्रेम के वजह से हुआ ।
परेम से उनकी ये हालत देखी नहीं गयी इसलिए वह उनकी मदत करने अमर का दोस्त नहीं बल्कि अमर के द्वारा किया गया अप्पोइंटेड एम्प्लोयी जो उनकी कंपनी मैं जॉब ज्वाइन करने वाला था ।
बांके गया वाहन पहुँच कर उसने निशा की हेल्प की अमर और निशा की कंपनी को आगे बढ़ने मैं प्रेम ने अमर के घरवालों को भी संभाला परेम अमर के घरवालों को अपना परिवार बना लिया अमर की छोटी बहन प्रेम को अपना भाई मानने लगी ।
कमार के पापा अमर की डेथ के बाद परलयज़ेड होचुके थे प्रेम ने उनका भी ख्याल रखा अमर की दादी निशा को बेटी मानती थी वह हर वक़्त निशा से कहती की वो कहीं और शादी करले पर निशा उन्हें अपना परिवार मंती थी उसने कभी कहीं और शाडू करने का नहीं सोचा वो अब भी अमर से प्यार करती थी । परेम धीरे धीरे करके उनके परिवार का हिस्सा बन चूका था धीरे धीरे प्रेम निशा से प्यार करने लगा त
निशा भी प्रेम का ये बेहेवियर अमर के परिवार और उसकी कंपनी की तरफ देखके वो भी उससे पसंद करने लगी थी ।
पर प्रेम ने कभी उससे अपनी दिल की बात नहीं कही क्यूंकि उससे डर था की जिस दिन सच्चाई सबके सामने आएगी तो सब उससे नफरत करेंगे । लेकिन अमर की दादी यही चाहती थी की निशा की शादी होजाये प्रेम से ककी प्रेम ही ह जो उससे समाज सकता है और प्यार भी करता है ।
ये सब देखकर प्रेम ने सारी सच्चाई बतादि सबको की कैसे अनजाने मैं उससे एक्सीडेंट होगया और अमर की डेथ होगायी ।
ये सच सुनने के बाद सबको काफी दुःख हुआ और गुस्सा भी आया प्रेम पर निशा को भी गुस्सा आया प्रेम पर और उसने शादी के लिए इंकार कर दिया ।
इस सब के बाद प्रेम वापस जब अपने घर जा रहा था तब उसका एक्सीडेंट होगया प्रेम को ऐसे हॉस्पिटल मैं देख के अमर के घरवालों को ऐसा लगा जैसे वो अपना बीटा दुबारा खो रहे है ।
निशा को तब अपने प्यार का एहसास हुआ की वो प्रेम से प्यार करती है और उससे यह एहसास होता है की कहीं न कहीं अमर भज यही चाहता होगा की उसके जाने के बाद प्रेम से ही वो अपना रिश्ता जोड़ ले ।
पहिर निशा को प्रेम के बैग से एक डायरी मिलती है जिसमें प्रेम ने लिखा होता है की वो निशा से कितना प्यार करता ह पर अपनी अनजाने मैं की गयी गलती से डरता है उसने सब कुछ उस डायरी मैं लिखा होता है अपनी फीलिंग्स अमर की दोस्ती परिवार का प्यार ये सब पढ़कर निशा को एहसास होता है की प्रेम भी उससे प्यार करता है और वो भगवन से प्रार्थना करती है की प्रेम बच जाए ।
ओर भगवन ने उसकी सुनली कुछ देर मैं डॉक्टर्स ाके बताते हैं की प्रेम अब सुरक्षित है और प्रेम के ठीक होने के बाद प्रेम और निशा दोनों शादी कर लेते हैं और ख़ुशी ख़ुशी अपनी ज़िन्दगी बिताते हैं ।
और निशा जिसको लगता था की वो अब किसीसे प्यार नहीं कर पाएगी ये मान लेती है की दुबारा किसी और से सच्चा प्यार किया जा सकता है ।

 

प्यार कोई खेल नहीं है

कहते है प्यार की कोई उम्र नहीं होती, कोई उम्र देख कर प्यार नहीं करता है। लेकिन कभी कभी उम्र के वजह से विचारो में बहुत अंतर हो जाते है और एक दूसरे को समझना मुश्किल हो जाता है।
अनन्या अपने दोस्तो के साथ पिकनिक मनाने के लिए गई थी।
उस पिकनिक स्पॉट पर और भी बहुत लोग थे।
कोई अपने फैमिली के साथ था थो कोई अपने दोस्तो के साथ। वहा अनन्या की नजर एक लड़के पर गई, वो भी अपने दोस्तो के साथ पिकनिक मनाने के लिए आया हुआ था।
अनन्या को वो लड़का बहुत अच्छा लगा, वो उसे देखे जा रही थी, उसकी नजर उस से हट ही नहीं रही थी, वो अपने दोस्तो के साथ थ्रो बॉल खेल रहा था।
जब शाम हुई घर जाने का वक्त हुआ तो अनन्या ने जाते जाते उसके एक दोस्त से उसके बारे में थोड़ा पूछताछ किया फिर अनन्या को पता चला कि उसका नाम राहुल है।
अनन्या घर जा कर उसे सोशल मीडिया पर ढूंडने लगी।
राहुल उसे फेसबुक पर मिला उसने तुरंत राहुल को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज दिया और इंतजार कर रही थी कब वो उसका रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करेगा।
अगले दिन जब सुबह अनन्या सो कर उठी तो सबसे पहले वो अपने फेसबुक अकाउंट पर गई देखने के लिए कि राहुल ने उसका रिक्वेस्ट एक्सेप्ट किया है कि नहीं, लेकिन वो उदास हो गई क्युकी अभी तक उसका रिक्वेस्ट एक्सेप्ट नहीं हुआ था।
फिर वो अपने बाकी काम में लग गई , दोपहर मे उसने देखा तो राहुल ने उसका फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर लिया था। वो तुरंत राहुल के प्रोफ़ाइल पर गई और उसके पहले के सब पोस्ट, उसके फोटो देखने लगी उसने राहुल के जन्मदिन की तारीख देखी कुछ दिनों पहले ही उसका जन्मदिन था, अनन्या ने ये भी देखा की राहुल उस से उमर में छोटा है, लेकिन अनन्या को इस से कोई फर्क नहीं पड़।
उसने राहुल को मेसेज भी कर दिया।
फिर वो राहुल से रोज बात करती थी। वो राहुल से उसके बारे में पूछती थी, उसकी पसंद ना पसंद सब। राहुल मेडिकल की पढ़ाई कर रहा था। अनन्या की ग्रेजुएशन हो गई थी।
एक दिन अनन्या राहुल के कॉलेज चली गई उसे देखने के लिए।
वो कॉलेज के बाहर ही खड़ी थी, वो राहुल का इंतजार कर रही थी।
राहुल अपने दोस्तो के साथ कॉलेज से बाहर निकला, उसके साथ 3 लड़कियां और 1 लड़का था, अनन्य राहुल को लड़कियों के साथ देख कर बहुत बुरा लगा, अनन्या उसके पास नहीं गई बस दूर से ही देखी। अनन्या ने घर आ कर राहुल को मेसेज किया की आज मैंने तुम्हे देखा। राहुल उस वक़्त ऑनलाइन ही था, उसने पूछा कहा, अनन्या ने कहा आज मै तुम्हरे कॉलेज आई थी, राहुल ने बोला आई थी तो मिली क्यों नहीं मुझसे, अनन्या बोली तुम अपने दोस्तो के साथ जा रहे थे और तुम्हारे साथ कुछ लड़कियां भी थी, एक बात पूछूं?
राहुल ने बोला हां पूछो।
अनन्या बोली क्या तुम्हारी गर्लफ्रेंड है।
उस वक़्त राहुल ने उसका मेसेज नहीं देखा, अनन्या इंतजार करती रही कि अब आयेगा राहुल का रिप्लाइ, लेकिन बहुत देर हो गई थी, राहुल ने रिप्लाइ नहीं किया था।
अगले दिन सुबह राहुल का रिप्लाइ आया कि नहीं है उसकी कोई गर्लफ्रेड, ये मेसेज देख कर अनन्या खुश हो गई। राहुल ने ये भी पूछा था कि क्यों पूछ रही हो ये। अनन्या बोली कुछ नहीं बस ऐसेही जानना था।अनन्या की बातो से राहुल को लगा कि शायद अनन्या उस से प्यार करती है, उसे भी अनन्या अच्छी लगती थी, ये जानते हुए भी अनन्या उस से उमर में बड़ी है फिर भी उसने कुछ दिनों बाद अनन्या को प्रपोज कर दिया।
अनन्या तो मानो सातवे आसमान पे थी, उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि वो जिस से प्यार करती है उसने सामने से खुद उसे प्रपोज किया है, वो खुद को दुनिया की सबसे खुशिस्मत लड़की मान ने लगी, वो नाच रही थी, खुशी मना रही थी।
मानो की अनन्या पागल सी हो गई थी। उसने राहुल को हा बोल दिया। वो दोनो रोज़ बाते करते,राहुल के कॉलेज के बाद मिलते थे साथ घूमने जाते थे।
उनके रिलेशन को लगभग 1 साल हो गए थे।
राहुल का तीसरा साल था मेडिकल में।
अनन्या अब जॉब करती थी, जॉब के वजह से वो पहले की तरह रोज़ राहुल से नहीं मिल पाती थी।
वो दिन भर जॉब में व्यस्त रहती थी और रात को फोन पर ही ज्यदा टाइम एक दूसरे से बात करते थे, और रविवार के दिन दोनों मिलते थे। जैसे जैसे समय बीतता गया दोनों के बीच झगड़े होने लगे।
राहुल उसे अब इग्नोर करने लगा था, वो अनन्या को दिन भर कुछ मेसेज नहीं करता था कि वो कहा है कैसी है, उसने खाना खाया की नहीं।
अनन्या रात में जॉब से आकर राहुल को फोन करती थी, लेकिन उस वक़्त भी बाते काम और झगड़े ज्यदा होते थे।
अनन्या को ये बिल्कुल अच्छा नहीं लगता था, वो चाहती थी कि राहुल उसे समझे की वो अब जॉब भी करती है तो पूरा टाइम उसे नहीं दे सकती, उसे भी अपना एक्रीर बनाना है, अनन्या राहुल को छोड़ भी नहीं सकती थी बहुत प्यार जो करती थीं उस से । फिर अनन्या ने सोचा कि अब वो ऑफिस से हाफ डे की छुट्टी ले कर राहुल से कभी कभी मिलने आजाया करेगी, इस से शायद झगड़े काम हो उनके बीच और वो दोनों एक दूसरे को टाइम दे सके।
फिर अगले ही दिन वो हाफ डे की छुट्टी ले कर राहुल से मिलने उसके कॉलेज गई।
उधर उसने देखा कि राहुल कॉलेज के बाहर एक लड़की के साथ था, उसी समय अनन्या ने राहुल को फोन किया, राहुल ने फोन देखा की अनन्या का कॉल आरहा है लेकिन उसने फोन नहीं उठाया, उसने फिर फोन किया राहुल ने इस बार भी फोन नही उठाया।
फिर अनन्या गुस्से में घर चली गई, शाम को राहुल ने उसे फोन किया, अनन्या ने पूछा कहा थे तुम मैंने तुम्हे दोपहर में कॉल किया था, राहुल ने कहा कॉलेज में था इस लिए फोन नहीं उठाया था, ये सुन कर अनन्या को और गुस्सा आ गया कि राहुल झूठ बोल रहा है, इसका मतलब राहुल ज़रूर मुझसे कुछ छुपा रहा है।
दो दिन बाद फिर अनन्या उसके कॉलेज गई, वहा उसे वो लड़की दिखी जिसे अनन्या ने राहुल के साथ तब देखा था जब वो पहली बार राहुल से मिलने कॉलेज गई थी।
अनन्या ने उस से बात किया, उसने पूछा तुम राहुल को जानती हो?
वो इसी कॉलेज में पढ़ता है, वो बोली हां जानती हूं वो मेरा दोस्त है।
फिर अनन्या ने उस से पूछा अभी क्या वो अपने क्लास में है, वो लड़की बोली नहीं वो अपनी गर्लफ्रंड के साथ आज घूमने गया है।
ये सुनते ही अनन्या को जैसे दिल का दौरा ही पड़ गया, उसने खुद को संभाला और पूछा उसकी गर्लफ्रेंड है? वो बोली हां है ना पिछले साल उनका ब्रेकअप हो गया था लेकिन अब फिर कुछ दिनों से दोनों साथ है, अनन्या ने उस से राहुल की गर्लफ्रेंड का नाम भी पूछा उसने बोला प्रिया।
ये सब कुछ सुन कर अनन्या को बहुत गुस्सा आरहा था।
वो सीधा अपने घर गई, वो बहुत रोई की मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ क्या गलती थी मेरी अगर वो किसी और से प्यार करता था तो मुझे क्यों प्रपोज किया?
क्या मै उसके लिए बस एक खिलौना हूं।
शाम को अनन्या ने राहुल को फोन किया, उसने पूछा कहा थे तुम पूरा दिन सुबह से ना एक मेसेज ना एक कॉल, राहुल बोला मैं कॉलेज में ही था, पढ़ाई का टेंशन है थोड़ा।
उस वक़्त तो अनन्या चीड़ गई और गुस्से में बोली ये प्रिया कौन है।
राहुल कुछ सेकंड रुक गया फिर बोला कौन प्रिया, अनन्या बोली अच्छा तुम किसी प्रिया को नहीं जानते, वो बोला नहीं। फिर अनन्या बोली मै उसी प्रिया के बारे में बात कर रही हूं जिसके साथ आज तुम घूमने गए थे। ये सुनते ही राहुल ने कॉल कट कर दिया। अनन्या उसे फोन करती रही लेकिन वो फोन नहीं उठाया। अनन्या ने उसे मेसेज किया की राहुल फोन उठाओ मुझे बस मेरे कुछ सवालों के जवाब चाहिए, उसके बाद भी राहुल ने फोन नहीं उठाया।
अनन्या ने उसे मेसेज किया कि कल मै तुम्हारे कॉलेज आरही हूं मुझे मिलना है।
इसपर राहुल ने तुरंत रिप्लाइ किया कॉलेज में नहीं तुम मुझे कॉलेज से पहले एक गार्डन आता है वहा मिलो, वो नहीं चाहता था कि कॉलेज में उसका नाम खराब हो और उसकी गर्लफ्रेंड को कुछ पता चले।
अगले दिन अनन्या उस से मिलने गई, उसने पूछा क्यों किया तुमने ऐसा, क्या गलती थी मेरी, तुमने मुझे खुद प्रपोज किया था, अगर तुम्हारी पहले से ही गर्लफ्रेंड थी तुम उस से प्यार करते थे तो मुझसे प्यार का नाटक क्यू।
फिर राहुल बोला जब मैंने तुम्हे प्रपोज किया था तब प्रिया मेरे साथ नहीं थी, लेकिन तुम अब अपने जॉब में व्यस्त हो गई थी, प्रिया मुझे रोज़ कॉल मेसेजेस करती थी और हमारे बीच की गलत फेमी अब दूर हो गई है जो पहले हुई थी और हम अलग हो गए थे, मै उसे प्यार करता हूं।
फिर अनन्या बहुत गुस्से में बोली प्यार क्या कोई खेल है क्या आज इसके साथ कल उसके साथ, क्या समझते हो तुम खुद को।
राहुल ने कहा जो कुछ भी हुआ उसके लिए मुझे माफ करदो लेकिन मै तुम्हारे साथ नहीं रह सकता, मै प्रिया से प्यार करता हूं। अनन्या बिना कुछ कहे वहा से चली गई।

 

पहला प्यार

हर किसी को कभी ना कभी प्यार होता ही है, और केहते है पहला ।
प्यार भुलाए नहीं भूलता कोई, पहला प्यार वो होता है जो सबकी जिंदगी में एक नया एहसास लाता है, पहला प्यार जिंदगी के सबसे खूबसूरत पलो में से एक होता है। लेकिन बहुत कम ही ऐसे किस्मत वाले लोग होते है जिनका पहला प्यार ही अखरी प्यार हो।
ऐसी ही एक कहानी प्रीति और अमित की है।
प्रीति और अमित एक ही स्कूल में पढ़ते थे। अमित 10वीं में था और प्रीति 9वीं में थी। वो दोनो एक दुसरे को पसंद करते थे लेकिन कभी किसी की हिम्मत नहीं हुई एक दूसरे को ये बोलने की, उन दोनों की आंखों में एक दूसरे के लिए प्यार साफ दिखता था। दोनों रोज़ स्कूल की असेम्बली के समय एक दूसरे को देखते थे और दोनों के चेहरे पर मुस्कान होती थी।
जब गार्मी की छुट्टियां चल रही थी और अमित को प्रीति की बहुत याद आ रही थी क्युकी अभी स्कूल भी बंद था और वो एक दूसरे को देख भी नही पाते थे और ना ही उनका घर कहीं एक दूसरे के आजू बाजू में था।
बहुत सोचते सोचते एक दिन अमित प्रीति को फेसबुक पर ढूंढने लागा, शायद उसका अकाउंट हो, स्कूल में उन दोनों ने कभी एक दूसरे से बात नही किया था, और ना ही कभी सोशल-मीडिया पर एक दूसरे को फॉलो करते थे, अब जो कि स्कूल बंद थे अमित खुद को रोक नहीं पाया, फेसबुक पर तो बहुत सी प्रीति नाम की लड़कियां मिली लेकिन जिस प्रीति को वो ढूंढ रहा था वो नहीं मिली। अमित बहुत उदास हो गया, वो बहुत बेचैन हो रहा था प्रीति को देखने के लिये, लेकिन वो कुछ नहीं कर सकता था, उधर प्रीती भी अमित को देखने के लिए स्कूल खुलने का इंतजार कर रही थी, प्रीति 9वीं कक्षा में थी तो उसके घर वालो न उसे फोन नही दिया था तो वो किसी भी सोशल-मीडिया पर नहीं थी।
स्कूल खुलने के लिये अभी 15 दिन बाकी था। वो दोनो एक दूसरे को देखने के लिए बेचैन थे।
आखिर 15 दिन बाद स्कूल खुल गया दोनों स्कूल जाने के लिये बहुत उतसुक थे, अमित स्कूल समय के 10 मिनट पहेले ही जाकर स्कूल गेट के बाहर खड़ा हो कर प्रीति का इंतजार कर रहा था, सब बच्चे एक एक कर के स्कूल आ रहे थे लेकिन प्रीति अभी तक उसे नहीं दिखी, गेट पर खड़े चौकीदार ने कहा कि अंदर जाओ अब गेट बंद होने वाला है।
आखिर अमित क्या करता वो अंदर चला गया और अपने क्लास में बैग रख कर प्रार्थना के लीये असेंबली में गया, वो बहुत उदास था की प्रीति क्यों नही आई, आज स्कूल का पेहला दिन है, क्या हुआ होगा उसे, अमित का ध्यान प्रार्थना में बिलकुल भी नहीं था ।
जब प्रार्थना ख़तम हुअा और सभी बच्चे अपने अपने क्लास में जाने लगे तभी अमित ने देखा की प्रीती अपने क्लास के लाइन में सबसे पीछे खड़ी थी तो वो समझ गया कि प्रीति लेट आई होगी, अमित उसे देख कर बहोत खुश हो गया, अमित उस से बात करना चाहता था, एक बार ऐसा हुआ की अमित और प्रीति की नजर मिली दोनो के चेहरे पर मुस्कुराहट थी, दोपहर में जब लंच टाइम हुआ तो अमित प्रीति से बात करने की कोशिश कर रहा था, इसी कारण उसने अपना टिफिन भी नहीं खाया था।
वो प्रीति के क्लास के बाहर ही चक्कर लगा रहा था की कब उसे मौका मिले प्रीति से बात करने का और वो उसे स्कूल के बाद रुकने के लिए बोल सके, तभी थोड़ी ही देर में प्रीति को क्लास से बाहर आते हुए देखा, वो अकेली थी, मौका देखते ही अमित ने प्रीति से कह दिया की स्कूल के बाद थोड़ी देर के लिये स्कूल के बाहर जो बस स्टॉप है वहा रुकना प्लीज! प्रीति उसे देख कर बोली ठीक है, और चली गई।
दोनों अपने क्लास में चले गए बस जल्दी से स्कूल का समय ख़तम होने का दोनों इंतजार कर रहे थे। प्रीति के मन में बहुत से प्रशन चल रहे थे “अमित क्या बोलेगा? मैं उस से क्या बात करूंगी?
स्कूल का समय ख़तम हुआ सभी बच्चे अपने घर जाने के लिये निकल गाये, प्रीति और अमित भी स्कूल से निकले और बस स्टॉप पर गये।
प्रीति जब वहा पहुंची तो अमित पहेले से ही वहां खाड़ा था।
प्रीति उसके पास गई और उस के बाजू में जाकर खड़ी हो गई, अमित का दिल बहुत ज़ोर से धड़कने लगा था, फिर अमित ने हिम्मत जूटा कर पूछा “तुम फेसबुक पर हो?” वो बोली “नहीं, मेरे पास फोन नहीं है” अमित ने पूछा “क्यों” तो प्रीति बोलीं “अभी मै 9वीं क्लास में हू और मेरे घर पर अभी फोन चलाना माना है” अमित बोला “ठीक है” फिर दोनों के बिच थोड़ी शांति थी, फिर अमित ने पूछा” आज तुम लेट क्यों आई स्कूल” प्रीति बोलीं “मेरी बस छूट गई थी मुझे देर हो गया” फिर प्रीति बोली “क्यों तुम मेरा इंताजार कर रहे थे?” अमित थोड़ा मुस्कुरा कर बोला “हा” फिर अमित ने पूछा की अभी तुम घर चली जाओगी तो अगर मुझे तुमसे बात करना हुआ तो कैसे बात करूंगा तुम अपना नंबर दो ना” प्रीति बोली “क्या बात करना है तुम्हे?” अमित बोला “ऐसी कोई बात नहीं है लेकिन फिर भी अगर बात करने के लिये मन हुआ तो” प्रीति बोली की मेरे दोस्तो के पास मेरे पापा का नंबर है उनको मुझसे बात करना रहता है या कुछ काम रहता है तो वो उस पर फोन करते है, लेकिन मै तुम्हे वो नंबर नहीं दे सकती” और तभी प्रीति की बस आ गई और वो अमित को बाय बोल कर चली गई।
अमित उधर ही रुका था थोड़ी देर तक और सोच रहा था की वो प्रीति से कैसे बात करे, यही सोचते सोचते वो घर चला गया, उसे प्रीति की बहुत याद आ रही थी, उधर प्रीति भी रात भर सोई नहीं उसे वो सब बात याद आ रही थी जो उसके और अमित के बीच हुई थी बस स्टॉप पर। आज पहली बार दोनों ने एक दूसरे से बात किया था। अगले दिन फिर दोनो स्कूल में मिले, दोनों खुश थे एक दूसरे को फिर से देख कर। कुछ दिनों तक ऐसा ही चलता रहा, वो दोनो बस स्टॉप पर थोड़ी देर के लिये मिलते और फिर अपने अपने चले जाते।
एक दिन अमित ने सोचा “बस हो गया मै और ऐसे नहीं रह सकता अब मै प्रीती को अपने दिल की बात कह दूंगा।
फिर क्या, अगले दिन बस स्टॉप पर प्रीति से मिलने गया तो बहुत ही हिम्मत जूटाकर गया था, अमित अंदर से बहुत घबराया हुआ था की प्रीति क्या बोलेगी, जब वो बस स्टॉप पर मिले तो प्रीति उस से अपने परीक्षा के बारे में बात कर रही थी तभी बिच में अमित बोल पड़ा “मुझे तुमसे कुछ बात करनी है” प्रीती बोली “हा बोलो” अमित चूप हो गया उसके दोनों पैर कापने लगे फिर उसने आंख बंद कर के जल्दी से बोल दिया “एई लव यू” ये सुनते ही प्रीति का दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या बोले।
अमित ने उस से कहा कुछ बोलो, तुम क्या सोचती हो मेरे बारे में, प्रीति चुप ही थी, अमित ने कहा “मुझे इंतज़ार रहेगा तुम्हारे जवाब का” और उधर से चाला गया, प्रीति उधर ही रुकी थी फिर कुछ ही देर में बस आई और वो भी चली गई। दोनो रात भर सोए नहीं।
प्रीति सोचती रही “क्या बोलू मै अमित को, ये सब जो हो रहा है सही है या गलात है” अमित बेसबरी से कल का इंतजार कर रहा था प्रीति के जवाब के लिए।
अगले दिन अमित स्कूल पहुंचा और देखा की प्रीति आज स्कूल ही नहीं आई, तो वो और ज्यादा बेचैन हो गया, प्रीति स्कूल क्यों नहीं आई, उसके मन में ऐसे बहुत से प्रशन चल रहे थे, वो किसी को कुछ पूछ भी नहीं सकता था, वो नहीं चाहता था कि स्कूल में ये बात किसी को पता चले और प्रीति को कुछ परेशानी हो।
वो बस प्रीति के बारे में ही सोच रहा था, पढ़ाई में बिलकुल भी ध्यान नहीं था उसका। स्कूल ख़तम हुअा तो वो सबसे पहले बस स्टॉप गया जहा वो रोज प्रीति से मिलता था, कुछ देर वही खड़ा था और फिर उदास हो कर घर चला गया इसी उम्मीद में की कल जैब प्रीति स्कूल अयेगी तब उस से सब पूछ लेगा। अगले दिन प्रीति स्कूल आई थी और स्कूल के बाद वो उसी बस स्टॉप पर अमित से मिली, प्रीति के आते ही अमित उस से पूछने लगा क्या हुआ था, कल तुम स्कूल क्यों नहीं आई।
प्रीति बोलीं कुछ नहीं लेट हो गया था।
अमित ने बोला तो क्या हुअा लेट ही आ जाती जैसे पहले आई थी देर से ।
प्रीति बोलीं नहीं ज्यदा लेट हो गया था क्युकी मै लेट सो कर उठी थी।
अमित मुस्कुराने लगा और फिर पूछा की “क्या सोचा, मैंने तुमसे कुछ कहा था कल” प्रीति चुप ही थी फिर बोली “क्या बोलू मुझे कुछ समझ ही नहीं आ रहा है”, अमित बोला “उसमे इतना क्या सोचना मुझे पता है तुम भी मुजसे प्यार करती हो, मैंने देखा है तुम्हारी आंखों में” प्रीति मुस्कुराने लगी फिर अमित प्रीति का जवाब समझ गया और बोला “मै समझ गया तुम्हारा जवाब लेकिन सुनो मुझे तुमसे बात करना रेहता है, कैस करू? तुम्हारे पास तो फोन भी नहीं है “प्रीति बोलीं तुम मुझे अपना नंबर देदो मै तुम्हे फोन कर दूंगी जब पापा का फोन मेरे पास होगा तो, लेकिन तुम दोबारा उस नंबर पर फोन नहीं करना” अमित बोला ठीक है और उसे अपना नंबर दे दीया। और दोनों अपने घर चले गए।
शाम को अमित इंतजार कर रहा था की शायद प्रीति फोन करे वो अपने फोन के तरफ ही बार बार देखे जा रहा था, शाम से रात हो गईं प्रीति का फोन नहीं आया, अगले दिन स्कूल के बाद अमित ने प्रीति से पूछा “तुमने फोन क्यों नहीं किया” वो बोली “पापा का फोन नहीं था मेरे पास और मुझे समझ भी नहीं आ रहा था की फोन पर मै क्या बात करूंगी” अमित बोला “इसमें क्या फोन करती तो बात अपने आप हो जती कुछ ।”
ऐसे ही वो दोनो रोज़ स्कूल के बाद मिलते थे और प्रीति कभी कभी अमित को फोन करतीं थी उनकी बाते होती थी। एक दीन ऐसा आया कि अमित का स्कूल में अखरी दिन था क्युकी वो 10वी क्लास के बोर्ड की परीक्षा शुरू होन वाली थी और 10वीं क्लास की बोर्ड परीक्षा की पढ़ाई के लिये चुट्टी होने वली थी, दोनो आज बस स्टॉप पर मिले प्रीति बहुत उदास थी कि कल से अमित स्कूल नहीं आयेगा और अमित भी बहुत उदास था ।
प्रीति ने अमित से कहा की “अच्छे से पढ़ाई करना बोर्ड पेपर के लिये” अमित बोला “हा” अमित की आंखो में असू थे और उसने कहा “कल से मै तुमसे नहीं मिल पाऊंगा, प्रीति शांत थी और बोली ऐसे उदास मत हो मै तुम्हे फोन करूंगी रोज़” अमित प्रीति को गले लगाना चाहता था लेकिन दोनो बस स्टॉप पर थे ।
इस लिए अमित ने कुछ नहीं किया बस प्रीति का हाथ पकड़ कर खड़ा था, वो सोच रहा था की काश समय इधर ही रुक जाता और दोनों हमेशा के लिये एक साथ ही रहते, लेकिन ऐसा नहीं हो सकता था, प्रीति की बस आगई अमित उसका हाथ छोड़ने के लिए तैयार ही नहीं था ।
प्रीति उसे बहुत समझा रही थी की “मुझे जाने दो, घर पहुंचने में देरी जो जाएगी तो मम्मी पूछेगी की देर से क्यों आईं, अमित फिर भी उसका हाथ छोड़ने को तायार नहीं था ।
उसने प्रीति का हाथ पकड़ा ही था और बस चली गई, प्रीति बोलीं देखो बस भी चली गई अब दुसरी बस कब तक आयगी, अमित बस प्रीति को देखे जा राहा था ।
कुछ ही देर में दूसरी बस भी आगई इस बार प्रीति बोलीं प्लीज मुझे जाने दो घर, मुझे बहुत डाट पड़ेगी मै और लेट हो गई तो, अमित ने बोला पहले वादा करो की तुम मुझे रोज फोन करोगी, प्रीति बोली हा करूंगी, इस बार अमित ने प्रीति का हाथ छोड़ दिया और प्रीति बस में चोली गई, अमित उधर ही खड़े हो कर प्रीति को देख रहा था, बस की खिड़की से प्रीति बाय बोलीं और फिर बस चली गई।
प्रीति अमित से फोन पर रोज बात करती थी।
जब 2 दीन बाकी थे परीक्षा के लिए, अमित को प्रीति से मिलाना था, एक दीन अमित प्रीति को बीना बताए स्कूल छुटने के समय उसी बस स्टॉप पर गया जहा वो रोज मिलते थे, प्रीति स्कूल के बाद घर जाने के लिए उसी बस स्टॉप पर आई, उसने देखा कि अमित बस स्टॉप पर था वो दूर से ही अमित को देख कर खुश हो गई ,फिर तो वो ना दाए देखी ना बाए और भागी भागी बस स्टॉप पर पहुंची, वो बहुत खुश थी ।
अमित के पास जाते ही वो बोली तुम यहा!
कल तो तुमने फोन पर नहीं कहा था तुम आने वाले हो, अमित बोला क्यूकी मै तुमहे सरप्राइज देना चाहता था इसलिए नहीं कहा था, प्रीति बोलीं अच्छा किया की तुम आ गए मिलने मुझे तुमरी बहुत याद आ रही थी, अमित बोला हा मुझे भी बहुत याद आ रही थी इस लिए आ गया परिक्षा के लिए बस दो दीन बाकी है सोचा मिल लूं।
प्रीति पूछी तुम्हारी पढ़ाई हो गई सब?
अमित बोला हा लगभग हो ही गई है सब, वो बोली ठीक है अच्छे से सब लिखना परिक्षा में तुमहे अच्छे मार्क्स लाना है। अमित बोला हा।
दो दिन बाद अमित का पहला पेपर था, परीक्षा के एक दिन पहले अमित का फोन खराब हो गया, अमित का छोटे भाई फोन से खेलते खेलते उसे पानी में गिरा दिया था।
अमित को बहुत गुस्सा आ रहा था क्युकी अब वो प्रीति से बात नहीं कर सकता था, और ना ही अभी उसे दूसरा फोन मिलता क्युकी परीक्षा चल रहा था तो उसके पापा उसे दूसरा फोन नहीं देते अभी।
उधर प्रीति भी बहुत परेशान थी की क्या हो गया अमित का फोन क्यों नहीं लगता अब, फिर वो सोची की शायद वो पढ़ाई करता रहता होगा तो फोन बंद कर दिया होगा।
प्रीति इंतजार केर ही थी की शायद परीक्षा ख़तम होते ही अमित मिलने आये। अमित ने येही सोचा था की जैसे ही परीक्षा ख़तम होगा तो वो प्रीति से मिलने जाएगा।
आखिर वो दिन आ ही गया आज अमित का आखरी परीक्षा था।
अमित बहुत खुश था की परीक्षा के बाद वो सिधा बस स्टॉप जाएगा प्रीति से मिलने।
आज उसका हिंदी विषय का परीक्षा था। वो परीक्षा में जल्दी जल्दी हाथ चला रहा था की जल्दी से पेपर ख़तम और वो प्रीति से मिलने जाए।
पेपर खतम हुआ और वो सबसे पहले अपने क्लास से निकला और सिधा उसी बस स्टॉप पर गया, अभी स्कूल की छुट्टी होने के लिये 2 घट्टे बाकी थे फिर भी वो चला गया उधर और इंतजार कर रहा था प्रीति का।
वो 2 घंटे भी उसे अब सालो लग रहे थे। 3 बज गए स्कूल के छुटने का समय हो गया अमित की नजर बस प्रीति को देखने के लिए बेचैन थी, वो बेसबरी से उसका इंताजार कर रहा था, आखिर प्रीति उसे दिख गई बस स्टॉप के तरफ आते हुए, प्रीति की नजर अमित की ओर दूर से ही गई।

वो खुद को रोक नहीं पाई और वो दौड़ने लगी की जलदी से अमित के पास पहुंच जाए, उसको इतना भी ध्यान नहीं था की वो रोड पर दौड़ रही है, तभी अचनाक से दुसरी तरफ से एक ट्रक बहुत ही तेजी से प्रीति के तरफ आ रहा थी अमित कुछ कर पाता उस के पहले वो ट्रैक प्रीति को टक्कर मार कर चला गया। अमित को कुछ समझ ही नहीं आया वो उधर ही खड़ा रह गया कुछ देर, और प्रीति के आजू बाजू बहुत भीड़ इक्कठा हो गई, तभी किसी ने एम्बुलेंस को फोन किया, अमित दौड़ के प्रीति के तरफ गया वो उसके पास जा ही रहा था की उधर खड़े लोगो ने उसे रोक दिया।
वो बिलकुल शांत हो गया था उसे समझ ही नहीं आया की क्या हुअा।
थोड़ी ही देर बाद एम्बुलेंस आई और प्रीति को पास वाले अस्पताल ले कर गई।
अमित उधर ही खड़ा रह गया।
कुछ देर बाद वो भी अस्पताल गया और प्रीति के लिए पूछताछ किया और उसके कमरे के तरफ गया, उधर उसने देखा की प्रीति के मम्मी पापा भी आ गये है।
अमित थोड़ी दुर ही खड़ा हो गया, उसने देखा की प्रीति की मम्मी रो रही थी, ये सब देख कर उसे भी रोना आ रहा था , कुछ देर बाद एक डॉक्टर निकले प्रीति के रूम से, प्रीति के पापा डॉक्टर के पास गये और उनसे पूछने लगे “कैसी है मेरी बेटी?,
वो ठीक तो है ना।
डॉक्टर उदास दिख रहे थे फिर वो बोले “हम आपकी बेटी को नही बचा पाए” ये सुनते ही अमित वहा से चाला गया, उसे बिलकुल नहीं समझ रहा था की वो कहा जाए क्या करे, वो बस स्टॉप के थोड़ी दुर पर एक गार्डन था वहा जा कर बैठ गया, वो बहुत रोने लगा, उसे प्रीति की बहुत याद आ रही थी, वो सोच रहा था की प्रीति उसके वजह से ही आज उसके साथ नहीं है, ना वो आज उस से मिलने आता और ना ही वो सब हुआ होता, शाम हो गई थी अमित वाहा ही बैठ कर बहुत रोए जा रहा था।
फिर किसी ने अमित को रोते हुए देखा तो उस से पूछा क्या हुआ तुम यहां बैठ कर क्यों रो रहे हो, अमित कुछ नहीं बोला, फिर उस आदमी ने कहा कि घर जाओ बहुत देर हो गई है तुम्हरे मम्मी पापा तुम्हारा इंतजार कर रहे होंगे। वो उधर से उठा और धीरे धीरे चलते चलते घर आया।
उसकी मम्मी उस से पूछने लगी कहां था इतने देर तक और परीक्षा कैसा था आज का, अमित बोला ठीक था और वो परीक्षा के बाद अपने दोस्त के घर चला गया था। इतना बोल कर वो अपने कमरे में चला गया। उसे खुद पर बहुत गुस्सा आरहा था, वो बहुत रोया, वो खुद को माफ नहीं कर पा रहा था, वो बस यही सोच रहा था कि सब उसकी गलती थी प्रीति की वो हालत उसके वजह से हुई।
कुछ महीनों बाद अमित का रिजल्ट आया बोर्ड परीक्षा का। उसने अपना रिजल्ट देखा और वो अच्छे नंबरों से पास हुआ था, उसे अपने रिजल्ट की कोई खुशी नहीं हुई। वो बस येही सोच रहा था की प्रीति होती थो वो कितनी खुश होती उसका रिजल्ट देख कर। अमित अब बिल्किल बदल गया था, अब वो ज्यदा किसी से बात भी नहीं करता था, बस अकेले अकेले रहता था।
आगे की पढ़ाई के लिये उसके मम्मी पापा ने उसे हॉस्टल भेज दिया।
अमित वहा जा कर थोड़ा बदल रहा था, अब वो बकी लोगो में थोड़ा घुल मिल कर रहता था लेकिन वो प्रीति को नहीं भुला था और ना ही खुद को माफ कर पाता था, वो पुरी जिंदगी खुद को प्रीति का गुनेहगार समझता रहा।
वो बस सोचता रहता कि उसके वजह से ही प्रीति उसे हमेशा के लिए छोड़ कर चली गई।

 

राज और काजल

राज को सामने वाली खिड़की में एक खूबसूरत लड़की दिखी।
राज जब देखा तो देखता ही रह गया उसे लगा मानों उस लड़की को कई जन्मों से जानता है उसकी सपनों में आने वाली लड़की।
उस लड़की का नाम काजल था।काजल ने भी राज को देखा फिर एक दिन पूछ ही लिया आप ऐसे क्यों देखते हो किसी ने अगर देख लिया तो बदनामी होगी।
राज – जी मैं जानता हूँ … लेकिन आपको देखते ही पता नहीं मुझे क्या हो जाता है ऐसा लगता है मैं आपको कई जन्मों …
काजल – ओके ओके फ़िल्मी डाइलॉग बन्द। लेकिन प्लीज आगे से अब मत देखना।
उस दिन काजल ने मना तो कर दिया लेकिन राज का इंतजार करती रही। राज आया..काजल ने मुस्कुराते हुवे राज को देखा। धीरे धीरे उन दोनों की बात बढ़ी घर से बाहर मिले …
कभी कभी दोनों छुप कर बाहर बाइक से एक साथ घूमने निकल जाते।
लेकिन ये लुका छिपी ज्यादा दिन तक नहीं चली। काजल के पिता को ये बात पता चली उन्होंने बेटी को डाँटा नहीं प्यार से समझाया – आप हमारी एकलौती बेटी हो .. आप अब बड़ी हो गई हो …
आपका किसी और के साथ घूमना अच्छा नहीं है। काजल – पापा वो ….
पापा – मैं जानता हूँ इस उम्र में मन भटक जाता है ..
. किसी को भी किसी से प्यार हो जाता है ..
.. लेकिन उसकी सजा पुरे परिवार को भुगतनी पड़ती है।
काजल – लेकिन पापा… मैं राज से .. से शादी …. वो भी तैयार …
पापा – शादी …. बेटी . प्यार अलग है और शादी करके जीवन निर्वाह अलग प्यार से खाना नहीं मिलता दो वक्त की रोटी के लिए पैसा चाहिए वैसे भी .. वो हमारी जाति का नहीं है …. तुम दोनों की एक गलती से दोनों परिवार का घर से निकलना मुश्किल हो जाएगा …. काज़ल – लेकिन मैं उसके बिना नहीं रह सकती…पापा
काजल रोने लगती है पापा प्यार से आँसू पोछते है और बोलते है तो तुम दोनों भाग कर शादी कर लो मैं तुम्हारी माँ और गांव से कह दूँगा विदेश पढ़ने गई है ….
काज़ल को पिता का प्यार देख रोना आ रहा था …
. वो पिता को छोड़ कर जाना नहीं चाहती थी … लेकिन राज को भी खोना नहीं चाहती थी …. रात भर सोचती रही क्या करे …. क्या वो अपने स्वार्थ और प्यार के लिए बचपन से प्यार करने वाले …
. छोटे छोटे हाथों को पकड़कर चलना सिखाने वाले को हमेशा के लिए छोड़ कर चली जाए….? नहीं…।
काजल ने पिता से ईजाजत ली राज से अंतिम बार मिलने की।
अगले दिल वो राज से मिली …और राज से सारी बात बताई
राज – तुम्हारा मन क्या कहता है …
काज़ल – जिन्होंने मुझे चलना सिखाया बोलना सिखाया … उन्हें धोखा देने का मन नहीं करता … लेकिन तुम्हारे बगैर रह भी नहीं सकती तुम जैसा कहो …मैं तुम्हारे साथ मरने … राज ने काजल के मुह पर हाथ रख दिया।
राज ने रोते हुवे कहा- नाज़ है मुझे अपनी मोहब्बत पर …. मैं … तुम्हारे बिना कैसे रहूँगा… मुझे नहीं पता …. लेकिन तुम तुम …. तुम हमेशा खुश रहना तुम्हारी ख़ुशी देख मैं जी लूँगा….
काज़ल ने भी रोते हुवे जवाब दिया – मैं भी तुम्हारे बिना नहीं रह सकती … राज … लेकिन मैं मजबूर हूँ …बस तुमसे आखरी बार मिलने …
राज – रोना नहीं काज़ल अगर ये हमारी आखरी मुलाक़ात है … तो इसमें आसूँ नहीं ख़ुशी होनी चाहिए जिसे देख मैं ज़िंदगी भर याद कर जी लूंगा ….
दोनों एक दूसरे को बाहों में भर कर शांत हो जाते है
काजल – तुम मेरी शादी के दिन आओगे …
राज – आऊंगा … जरूर आऊंगा …. और जी भर कर नाचूँगा …. जी भर कर
राज फिर रोने लगता है …
काजल – ख़ुद कहते हो ख़ुश रहने को फिर रोते हो …
राज – ये कमबख्त आसूँ भी ना रोकने से भी …बट नो .. आई एम हैप्पी नाउ …
फिर शांति … कब शाम हो गई पता भी ना चला … दोनों दूर तक एक दूसरे को देखते हुवे विदा हो गए …
. नियत समय पर काजल की शादी तय हो गई बारात भी आई बहुत सारे रश्म भी हो गए … लेकिन एकाएक लड़के ने शादी रोक दी उसके हाथ में कुछ फ़ोटो थे … राज और पूजा के … उसने उसी समय राज को बुलाने को कहा….
चारो तरफ कानाफूसी होने लगी सभी काजल के चरित्र पर आवाज उठाने लगे …
दूल्हा – तुझे तेरे प्यार काजल की कसम तू काजल से प्यार करता है …या नहीं
राज – वो मैं …
दूल्हा- अगर मगर कुछ नहीं हाँ या ना…
राज – हाँ
दूल्हा – राज सिन्हा की प्रेम कहानियों का बहुत असर है तुम पर झूठ बोल देते तो मर जाती क्या ये … हाँ … जब रस चूस लिया तो क्या मैं शादी करके गुठली चुसुंगा …. कितने बार हनीमून मनाया है … बोल ना….
सभी की नजरें कभी राज को तो कभी काज़ल को … काज़ल को लगा वो मर क्यों नहीं गई …. इतनी बाते सुनने से पहले…
राज – आप गलत सोच रहे है …. ऐसी कोई सम्बन्ध ….
दूल्हा – कोई … प्रूफ है तुम्हारे पास …
राज ने काज़ल की तरफ देखा ….वो बस रोये जा रही थी ….
राज – हाँ प्रूफ है …
दूल्हा – तो दिखाओ …. प्रूफ दिखाएंगे ….
राज – मरता हुवा आदमी कभी झूठ नहीं बोलता …. काज़ल को मैंने दिल से प्यार किया है। कभी भी उसे ग़लत नजरों से नहीं देखा … वो कल भी पाक थी आज भी पाक है।
इतना कहकर राज दो मंजिले से नीचे कूद जाता है उसका शरीर दूल्हे के कार पर गिरती है … काजल राज को चिल्लाती हुई किनारे आती है राज की हालत देख और जोर से रोने लगती है।
काज़ल – हो गया ना विश्वास तुम्हे दीपक माथुर …. तुम तो सोनिया के पीछे पीछे कॉलेज में घूमते थे मैंने तुम्हे उसके बारे में कुछ पुछा … नहीं ना…
अब हो गई ना तस्सली …. राज … राज … अगर उसे मुझसे सच्चा प्यार नहीं होता तो मैं आज यहां नहीं होती …
वो कब का मेरे जिश्म से खेल कर मुझे भगा कर ले गया होता और किसी कोठे पर बेच देता … नहीं रहना इस पापी दुनियाँ में तुम लोगो के बिच नहीं रहना …. राज मैं आ रही हूँ …
काजल ने भी ऊपर से छलांग लगाई वो भी कार पर …
धड़ाक…
दोनों के सर फ़ट गए थे … पूरा कार खून से लथपथ हो रहा था … राज ने हल्के से आँखे खोली राज – दर्द हो रहा है …
काजल – नहीं …. तुम साथ हो तो दर्द कैसा।
फिर दोनों ने एक दूसरे के हाथों में हाथ पकड़ा और हमेशा के लिए आँखे बन्द कर ली।
आज पूरा ज़माना देख रहा था लेकिन किसी में हिम्मत नहीं थी कि इन दोनों बेपनाह मोहब्बत करने वालों पर ऊँगली उठाये ।
. . शिक्षा – कोई भी युवा गलती करता है तो उनके गार्ज़ियन अगर प्यार से आराम से समझाये तो वो युवा समझ सकता है। और दूसरी ये बात मौत सोलुशन नहीं है। आप ऐसा ना करे ।

 

दो पल क लिए मिलना,और प्यार हो जाना

क्या है ये दो पल का प्यार ??
क्या हो सकता है किसी को दो पल में किसी से प्यार? नहीं जानते? चलिए हम बताते हैं आपको…
फिर आप खुद ही अंदाज़ लगा लीजिएगा कि किसी को दो पल के मुलाकत में प्यार होता है या नहीं।
ये प्रेम कहानी बिहार मे बसी एक छोटा सा गांव महरैल की है…जितनी प्यारी ये गाँव है..उतनी ही प्यारे यहाँ के रहने वाले लोग है ।
यहाँ के लोग अपने जरूरत की समान लाने, गाँव से थोड़ा दूर बसी एक बाजार जाते है।
एक दिन महरैल गाँव के एक लड़का जिसका नाम अभिषेक है ।
वो भी रोज जाता था। एक समय आया की वो रोज सज-धज के उस बाजार जाने लगा…
अब आप पूछोगे….सज धज के क्यों जाने लगा वो ???
तो बात ये थी कि एक दिन जब वो बाजार से गुजर रहा था तो उसे एक लड़की दिखी…
अभिषेक उस लड़की से अपनी नजर हटा ही नही रहे थे….और फिर जब कुछ देर तक
नजर नहीं हटाए तो सामने से लड़की की भी नजर पड़ी उस लड़के पे…फिर क्या….दोनों एक दूसरे को देखते रहे…अब ये दो पल की
यू इस तरह देखा-देखि मैं ही शहजादे को प्यार हो गया….फिर क्या उस दिन के बाद रोज अभिषेक बाजार सज-धज के जाने लगे…और फिर वो इधर उधर
देखे जा रहा था..तभी दूसरी और से एक लड़की गुजर रही थी ..और उस लड़के क चेहरे पे मुस्कुराहट बया कर दी कि अभिषेक का दिल
इन्ही का इंतज़ार कर रहा था…वो लड़की अपने मम्मी के साथ आती थी..हाथ मे थेली थी..जिसे देख के लग रहा था कि वो भी सामान लेने आयी
है…वो लड़का उसे बस देखे जा रहा था..कुछ देर में वो चले जाती है।
ऐसे ही वो रोज बाजार आती और लड़का उस के आने से पहले
वहा आ जाता..और जब तक लड़की बाजार मे रहती वो उसे ही देखते रहता बस..
और फिर उस के जाने के बाद वो भी चला जाता….वो रोज कोशिश करता बात
करने की लेकिन वो जैसे ही बात करने जाता कि वो चल देती थी या सामने कोई आ जाता था।
वो दो पल का वक़्त मैं वो लड़का बस कोशिश
करता कि कैसे वो अपने दिल की बात उस लड़की से कहे…फिर एक दिन किस्मत ने भी उसका साथ दे दिया और एक दिन वो अकेली ही बाजार आयी बस
फिर क्या वो लड़का उस लड़की के पास गया..और उसका का करिश्मा देखो..दोनों एक साथ बोल पड़े कि…मुझे कुछ कहना है
क्या पल था वो…फिर क्या…लड़का डर गया..उसे लगा कहीं इसे बुरा न लग गया हो की मैं इसे रोज यहाँ देखता रहता हूँ या कोई और
बात..वो डर के उस लड़की के तरफ देखा..और धीमी आवाज में उसे कहा ..बोलो क्या हुआ….लड़की फिर कहती है तुम बोलो कि क्या कहना है ?
लड़का डर रहा था कुछ कहने से अब और उसने पहले उसे ही कह दिया की तुम बोलो पहले
फिर अचानक से दोनों एक ही साथ अपनी-अपनी दिल की बाते बोल दी…लड़का सुनते ही अपना होश ही खो दिया
क्योंकि उसे कभी लगा ही नही था की…लड़की भी उससे प्यार करती है।
कुदरत का खेल तो देखो…लड़की भी रोज इसीलिए आती थी कि..वो रोज उस लड़के को देख सके…प्यार दोनों मैं पहले दिन के एक पल से ही
हो गया था। लेकिन एक दूसरे को बताने का मौका नहीं मिल रहा था।
फिर क्या….रोज यही आने लगे एक दूसरे से मिलने लगे।
कुछ समय बाद दोनों ने अपने-अपने घर में बात की और दोनों ने शादी कर ली…..
और इस तरह से वो दोनों हमेशा के लिए साथ हो गए और ख़ुशी-ख़ुशी रहने लगे।
इससे ये पता चलता है कि प्यार करने में साल या महीना नहीं लग जाता है प्यार तो वो खुसी है, वो एहसास है, वो विश्वास है जो एक पल में और बस एक नजर में ही किसी को किसी से हो जाता है।

 

पति-पत्नी का सच्चा प्यार

एक आदमी ने एक बहुत ही खूबसूरत लड़की से शादी की।
शादी के बाद दोनो की ज़िन्दगी बहुत प्यार से गुजर रही थी।
वह उसे बहुत चाहता था और उसकी खूबसूरती की हमेशा तारीफ़ किया करता था।
लेकिन कुछ महीनों के बाद लड़की चर्मरोग (Skin Disease) से ग्रसित हो गई और धीरे-धीरे उसकी खूबसूरती जाने लगी।
खुद को इस तरह देख उसके मन में डर समाने लगा कि यदि वह बदसूरत हो गई, तो उसका पति उससे नफ़रत करने लगेगा और वह उसकी नफ़रत बर्दाशत नहीं कर पाएगी।
इस बीच एकदिन पति को किसी काम से शहर से बाहर जाना पड़ा।
काम ख़त्म कर जब वह घर वापस लौट रहा था, उसका Accident हो गया।
Accident में उसने अपनी दोनो आँखें खो दी।
लेकिन इसके बावजूद भी उन दोनो की जिंदगी सामान्य तरीके से आगे बढ़ती रही।
समय गुजरता रहा और अपने चर्मरोग के कारण लड़की ने अपनी खूबसूरती पूरी तरह गंवा दी।
वह बदसूरत हो गई, लेकिन अंधे पति को इस बारे में कुछ भी पता नहीं था।
इसलिए इसका उनके खुशहाल विवाहित जीवन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।
वह उसे उसी तरह प्यार करता रहा।
एकदिन उस लड़की की मौत हो गई।
पति अब अकेला हो गया था। वह बहुत दु:खी था। वह उस शहर को छोड़कर जाना चाहता था।
उसने अंतिम संस्कार की सारी क्रियाविधि पूर्ण की और शहर छोड़कर जाने लगा।
तभी एक आदमी ने पीछे से उसे पुकारा और पास आकर कहा,
“अब तुम बिना सहारे के अकेले कैसे चल पाओगे?
इतने साल तो तुम्हारी पत्नि तुम्हारी मदद किया करती थी।
पति ने जवाब दिया, दोस्त! मैं अंधा नहीं हूँ! मैं बस अंधा होने का नाटक कर रहा था।
क्योंकि यदि मेरी पत्नि को पता चल जाता कि मैं उसकी बदसूरती देख सकता हूँ, तो यह उसे उसके रोग से ज्यादा दर्द देता।
इसलिए मैंने इतने साल अंधे होने का दिखावा किया।
वह बहुत अच्छी पत्नि थी। मैं बस उसे खुश रखना चाहता था।
सीख:- खुश रहने के लिए हमें भी एक दूसरे की कमियो के प्रति आखे बंद कर लेनी चाहिए..
और उन कमियो को नजरन्दाज कर देना चाहिए…।

 

प्यार से विवाह तक का सफर

प्यार से विवाह तक का सफर इतना लंबा होगा उन्होंने सोचा न था ।

दो युवा दिलों ने दांपत्य जीवन के सपने संजोने शुरू कर दिए थे लेकिन इंतजार की घड़ियां बढ़ती ही जा रही थीं ।
मुझे गुमसुम और उदास देख कर मां ने कहा, ‘‘क्या बात है, रति, तू इस तरह मुंह लटकाए क्यों बैठी है? कई दिन से मनोज का भी कोई फोन नहीं आया । दोनों ने आपस में झगड़ा कर लिया क्या?’’
‘नहीं, मां, रोज रोज क्या बात करें ।
कितने दिनों से शादी की तैयारी कर रहे थे, सब व्यर्थ हो गई. यदि मनोज के दादाजी की मौत न हुई होती तो आज तेरी शादी को 15 दिन हो चुके होते । वह काफी बूढ़े थे । तेरहवीं के बाद शादी हो सकती थी पर तेरे ससुराल वाले बड़े दकियानूसी विचारों के हैं । कहते हैं कि साए नहीं हैं । अब तो 5-6 महीने बाद ही शादी होगी ।
हमारी तो सब तैयारी व्यर्थ हो गई । शादी के कार्ड बंट चुके थे । फंक्शन हाल को, कैटरर्स को, सजावट करने वालों को, और भी कई लोगों को एडवांस पेमेंट कर चुके थे । 6 महीने शादी सरकाने से अच्छाखासा नुकसान हो गया है ।
इसी बात से तो मनोज बहुत डिस्टर्ब है, मां. पर कुछ कह नहीं पाता ।
बेटा, हम भी कभी तुम्हारी उम्र के थे । तुम दोनों के एहसास को समझ सकते हैं, पर हम चाह कर भी कुछ नहीं कर सकते । मैं ने तो तेरी सास से कहा भी था कि साए नहीं हैं तो क्या हुआ, अच्छे काम के लिए सब दिन शुभ होते हैं…अब हमें शादी कर देनी चाहिए ।
मेरा इतना कहना था कि वह तो भड़क गईं और कहने लगीं, आप के लिए सब दिन शुभ होते होंगे पर हम तो सायों में भरोसा करते हैं । हमारा इकलौता बेटा है, हम अपनी तरफ से पुरानी मान्यताओं को अनदेखा कर मन में कोई वहम पैदा नहीं करना चाहते ।
रति सोचने लगी कि मम्मी इस से ज्यादा क्या कर सकती हैं और मैं भी क्या करूं, मम्मी को कैसे बताऊं कि मनोज क्या चाहता है ।
नर्सरी से इंटर तक हम दोनों साथसाथ पढ़े थे । किंतु दोस्ती इंटर में आने के बाद ही हुई थी । इंटर के बाद मनोज इंजीनियरिंग करने चला गया और मैं ने बी.एससी. में दाखिला ले लिया था । कालिज अलग होने पर भी हम दोनों छुट्टियों में कुछ समय साथ बिताते थे । बीच में फोन पर बातचीत भी कर लेते थे । कंप्यूटर पर चैट हो जाती थी ।
एम.एससी. में आते ही मम्मीपापा ने शादी के लिए लड़का तलाशने की शुरुआत कर दी मैं ने कहा भी कि मम्मी, एम.एससी. के बाद शादी करना पर उन का कहना था कि तुम अपनी पढ़ाई जारी रखो, शादी कौन सी अभी हुई जा रही है, अच्छा लड़का मिलने में भी समय लगता है ।
शादी की चर्चा शुरू होते ही मनोज की छवि मेरी आंखों में तैर गई थी । यों हम दोनों एक अच्छे मित्र थे पर तब तक शादी करने के वादे हम दोनों ने एकदूसरे से नहीं किए थे । साथ मिल कर भविष्य के सपने भी नहीं देखे थे पर मम्मी द्वारा शादी की चर्चा करने पर मनोज का खयाल आना, क्या इसे प्यार समझूं. क्या मनोज भी यही चाहता है, कैसे जानूं उस के दिल की बात ।
मुलाकात में मनोज से मम्मी द्वारा शादी की पेशकश के बारे में बताया तो वह बोला, ‘‘इतनी जल्दी शादी कर लोगी, अभी तो तुम्हें 2 वर्ष एम.एससी. करने में ही लगेंगे,’’ फिर कुछ सोचते हुए बोला था, ‘‘सीधेसीधे बताओ, क्या मुझ से शादी करोगी…पर अभी मुझे सैटिल होने में कम से कम 2-3 वर्ष लगेंगे ।
प्रसन्नता की एक लहर तनमन को छू गई थी, ‘‘सच कहूं मनोज, जब मम्मी ने शादी की बात की तो एकदम से मुझे तुम याद आ गए थे…क्या यही प्यार है?’’
मैं समझता हूं यही प्यार है देखो, जो बात अब तक नहीं कह सका था, तुम्हारी शादी की बात उठते ही मेरे मुंह पर आ गई और मैं ने तुम्हें प्रपोज कर डाला ।
अब जब हम दोनों एकदूसरे से चाहत का इजहार कर ही चुके हैं तो फिर इस विषय में गंभीरता से सोचना होगा ।
सोचना ही नहीं होगा रति, तुम्हें अपने मम्मीपापा को इस शादी के लिए मनाना भी होगा ।
‘‘क्या तुम्हारे घर वाले मान जाएंगे?’’
देखो, अभी तो मेरा इंजीनियरिंग का अंतिम साल है । मेरी कैट की कोचिंग भी चल रही है…उस की भी परीक्षा देनी है । वैसे हो सकता है इस साल किसी अच्छी कंपनी में प्लेसमेंट मिल जाए क्योंकि कालिज में बहुत सी कंपनियां आती हैं और जौब आफर करती है । अच्छा आफर मिला तो मैं स्वीकार कर लूंगा और जैसे ही शादी की चर्चा शुरू होगी मैं तुम्हारे बारे में बता दूंगा ।
प्यार का अंकुर तो हमारे बीच पनप ही चुका था और हमारा यह प्यार अब जीवनसाथी बनने के सपने भी देखने लगा था । अब इस का जिक्र अपनेअपने घर में करना जरूरी हो गया था ।
मैं ने मम्मी को मनोज के बारे में बताया तो वह बोलीं, ‘‘वह अपनी जाति का नहीं है…यह कैसे हो सकता है, तेरे पापा तो बिलकुल नहीं मानेंगे क्या मनोज के मातापिता तैयार हैं?’’
अभी तो इस बारे में उस के घर वाले कुछ नहीं जानते फाइनल परीक्षा होने तक मनोज को किसी अच्छी कंपनी में जौब का आफर मिल जाएगा और रिजल्ट आते ही वह कंपनी ज्वाइन कर लेगा. उस के बाद ही वह अपने मम्मीपापा से बात करेगा ।
‘‘क्या जरूरी है कि वह मान ही जाएंगे?’’
‘‘मम्मी, मुझे पहले आप की इजाजत चाहिए ।’’
यह फैसला मैं अकेले कैसे ले सकती हूं…तुम्हारे पापा से बात करनी होगी…उन से बात करने के लिए मुझे हिम्मत जुटानी होगी. यदि पापा तैयार नहीं हुए तो तुम क्या करोगी?’’
‘करना क्या है मम्मी, शादी होगी तो आप के आशीर्वाद से ही होगी वरना नहीं होगी ।
इधर मेरा एम.एससी. फाइनल शुरू हुआ उधर इंजीनियरिंग पूरी होते ही मनोज को एक बड़ी कंपनी में अच्छा स्टार्ट मिल गया था और यह भी करीबकरीब तय था कि भविष्य मेें कभी भी कंपनी उसे यू.एस. भेज सकती है. मनोज के घर में भी शादी की चर्चा शुरू हो गई थी ।
मैं ने मम्मी को जैसेतैसे मना लिया था और मम्मी ने पापा को किंतु मनोज की मम्मी इस विवाह के लिए बिलकुल तैयार नहीं थीं । इस फैसले से मनोज के घर में तूफान उठ खड़ा हुआ था । उस के घर में पापा से ज्यादा उस की मम्मी की चलती है । ऐसा एक बार मनोज ने ही बताया था…मनोज ने भी अपने घर में ऐलान कर दिया था कि शादी करूंगा तो रति से वरना किसी से नहीं ।
आखिर मनोज के बहनबहनोई ने अपनी तरह से मम्मी को समझाया था, ‘‘मम्मी, आप की यह जिद मनोज को आप से दूर कर देगी, आजकल बच्चों की मानसिक स्थिति का कुछ पता नहीं चलता कि वह कब क्या कर बैठें । आज के ही अखबार में समाचार है कि मातापिता की स्वीकृति न मिलने पर प्रेमीप्रेमिका ने आत्महत्या कर ली…वह दोनों बालिग हैं. मनोज अच्छा कमा रहा है । वह चाहता तो अदालत में शादी कर सकता था पर उस ने ऐसा नहीं किया और आप की स्वीकृति का इंतजार कर रहा है अब फैसला आप को करना है ।
मनोज के पिता ने कहा था, ‘‘बेटा, मुझे तो मनोज की इस शादी से कोई एतराज नहीं है…लड़की पढ़ीलिखी है, सुंदर है, अच्छे परिवार की है… और सब से बड़ी बात मनोज को पसंद है । बस, हमारी जाति की नहीं है तो क्या हुआ पर तुम्हारी मम्मी को कौन समझाए ।
‘‘जब सब तैयार हैं तो मैं ही उस की दुश्मन हूं क्या…मैं ही बुरी क्यों बनूं? मैं भी तैयार हूं ।’’
मम्मी का इरादा फिर बदले इस से पहले ही मंगनी की रस्म पूरी कर दी गई थी । तय हुआ था कि मेरी एम.एससी. पूरी होते ही शादी हो जाएगी ।
मंगनी हुए 1 साल हो चुका थ । शादी की तारीख भी तय हो चुकी थी । मनोज के बाबा की मौत न हुई होती तो हम दोनों अब तक हनीमून मना कर कुल्लूमनाली, शिमला से लौट चुके होते और 3 महीने बाद मैं भी मनोज के साथ अमेरिका चली जाती ।
पर अब 6-7 महीने तक साए नहीं हैं अत: शादी अब तभी होगी ऐसा मनोज की मम्मी ने कहा है । पर मनोज शादी के टलने से खुश नहीं है । इस के लिए अपने घर में उसे खुद ही बात करनी होगी । हां, यदि मेरे घर से कोई रुकावट होती तो मैं उसे दूर करने का प्रयास करती ।
पर मैं क्या करूं माना कि उस के भी कुछ जजबात हैं 4-5 वर्षों से हम दोस्तों की तरह मिलते रहे हैं, प्रेमियों की तरह साथसाथ भविष्य के सपने भी बुनते रहे हैं किंतु मनोज को कभी इस तरह कमजोर होते नहीं देखा । यद्यपि उस का बस चलता तो मंगनी के दूसरे दिन ही वह शादी कर लेता पर मेरा फाइनल साल था इसलिए वह मन मसोस कर रह गय ।
प्रतीक्षा की लंबी घडि़यां हम कभी मिल कर, कभी फोन पर बात कर के काटते रहे । हम दोनों बेताबी से शादी के दिन का इंतजार करते रहे. दूरी सहन नहीं होती थी । साथ रहने व एक हो जाने की इच्छा बलवती होती जाती थी. । जैसे-जैसे समय बीत रहा था, सपनों के रंगीन समुंदर में गोते लगाते दिन मंजिल की तरफ बढ़ते जा रहे थे । शादी के 10 दिन पहले हम ने मिलना भी बंद कर दिया था कि अब एकदूसरे को दूल्हादुलहन के रूप में ही देखेंगे पर विवाह के 7 दिन पहले बाबाजी की मौत हमारे सपनों के महल को धराशायी कर गई ।
बाबाजी की मौत का समाचार मुझे मनोज ने ही दिया था और कहा था, ‘‘बाबाजी को भी अभी ही जाना था । हमारे बीच फिर अंतहीन मरुस्थल का विस्तार है । लगता है, अब अकेले ही अमेरिका जाना पडे़ग । तुम से मिलन तो मृगतृष्णा बन गया है ।
तेरहवीं के बाद हम दोनों गार्डन में मिले थे. वह बहुत भावुक हो रहा था, ‘‘रति, तुम से दूरी अब सहन नहीं होती. मन करता है तुम्हें ले कर अनजान जगह पर उड़ जाऊं, जहां हमारे बीच न समाज हो, न परंपराएं हों, न ये रीतिरिवाज हों । 2 प्रेमियों के मिलन में समाज के कायदे- कानून की इतनी ऊंची बाड़ खड़ी कर रखी है कि उन की सब्र की सीमा ही समाप्त हो जाए. चलो, रति, हम कहीं भाग चलें…मैं तुम्हारा निकट सान्निध्य चाहता हूं । इतना बड़ा शहर है, चलो, किसी होटल में कुछ घंटे साथ बिताते हैं ।
जो हाल मनोज का था वही मेरा भी था । एक मन कहता था कि अपनी खींची लक्ष्मण रेखा को अब मिटा दें किंतु दूसरा मन संस्कारों की पिन चुभो देता कि बिना विवाह यह सब ठीक नहीं । वैसे भी एक बार मनोज की इच्छा पूरी कर दी तो यह चाह फिर बारबार सिर उठाएगी, ‘‘नहीं, यह ठीक नहीं ।
‘‘क्या ठीक नहीं, रति. क्या तुम को मुझ पर विश्वास नहीं? पतिपत्नी तो हमें बनना ही है । मेरा मन आज जिद पर आया है, मैं भटक सकता हूं, रति, मुझे संभाल लो,’’ गार्डन के एकांत झुटपुटे में उस ने बांहों में भर कर बेतहाशा चूमना शुरू कर दिया था । मैं ने भी आज उसे यह छूट दे दी थी ताकि उस का आवेग कुछ शांत हो किंतु मनोज की गहरीगहरी सांसें और अधिक समा जाने की चाह मुझे भी बहकाए उस से पूर्व ही मैं उठ खड़ी हुई ।
अपने को संभालो, मनोज । यह भी कोई जगह है बहकने की? मैं भी कोई पत्थर नहीं, इनसान हूं…कुछ दिन अपने को और संभालो ।
‘‘इतने दिन से अपने को संभाल ही तो रहा हूं ।’’
‘‘जो तुम चाह रहे हो वह हमारी समस्या का समाधान तो नहीं है । स्थायी समाधान के लिए अब हाथपैर मारने होंगे. चलो, बहुत जोर से भूख लगी है, एक गरमागरम कौफी के साथ कुछ खिला दो, फिर इस बारे में कुछ मिल कर सोचते हैं ।’’
रेस्टोरेंट में बैरे को आर्डर देने के बाद मैं ने ही बात शुरू की, ‘‘मनोज, तुम्हें अब एक ही काम करना है… किसी तरह अपने मातापिता को जल्दी शादी के लिए तैयार करना है, जो बहुत मुश्किल नहीं. आखिर वे हमारे शुभचिंतक हैं, तुम ने उन से एक बार भी कहा कि शादी इतने दिन के लिए न टाल कर अभी कर दें ।’’ ‘‘नहीं, यह तो नहीं कहा ।’’
‘‘तो अब कह दो. कुछ पुराना छोड़ने और नए को अपनाने में हरेक को कुछ हिचक होती है । अपनी इंटरकास्ट मैरिज के लिए आखिर वह तैयार हो गए न तुम देखना बिना सायों के शादी करने को भी वह जरूर मान जाएंगे ।’’
मनोज के चेहरे पर खुशी की एक लहर दौड़ गई थी, ‘‘तुम ठीक कह रही हो रति, यह बात मेरे ध्यान में क्यों नहीं आई? खाने के बाद तुम्हें घर पर छोड़ देता हूं. कोर्ट मैरिज की डेट भी तो पास आ गई है, उसे भी आगे नहीं बढ़ाने दूंगा ।’’
‘‘ठीक है, अब मैरिज वाले दिन कोर्ट में ही मिलेंगे ।’’
‘‘मेरे आज के व्यवहार से डर गईं क्या? इस बीच फोन करने की इजाजत तो है या वह भी नहीं है?’’
‘‘चलो, फोन करने की इजाजत दे देते हैं ।’’
रजिस्ट्रार के आफिस में मैरिज की फार्र्मेलिटी पूरी होने के बाद हम दोनों अपने परिवार के साथ बाहर आए तो मनोज के जीजाजी ने कहा, ‘‘मनोज, अब तुम दोनों की शादी पर कानून की मुहर लग गई है । रति अब तुम्हारी हुई ।’’
‘‘ऐ जमाई बाबू, ये इंडिया है, वह तो वीजा के लिए यह सब करना पड़ा है वरना इसे हम शादी नहीं मानते । हमारे घर की बहू तो रति विवाह संस्कार के बाद ही बनेगी,’’ मेरी मम्मी ने कहा ।
‘‘वह तो मजाक की बात थी, मम्मी, अब आप लोग घर चलें । मैं तो इन दोनों से पार्टी ले कर ही आऊंगा ।’’
होटल में खाने का आर्डर देने के बाद मनोज ने अपने जीजाजी से पूछा, ‘‘जीजाजी, मम्मी तक हमारी फरियाद अभी पहुंची या नहीं?’’
‘‘साले साहब, क्यों चिंता करते हो. हम दोनों हैं न तुम्हारे साथ. अमेरिका आप दोनों साथ ही जाओगे । मैं ने अभी बात नहीं की है, मैं आप की इस कोर्ट मैरिज हो जाने का इंतजार कर रहा था । आगे मम्मी को मनाने की जिम्मेदारी आप की बहन ने ली है । इस से भी बात नहीं बनी तो फिर मैं कमान संभालूंगा ’’
‘‘हां, भैया, मैं मम्मी को समझाने की पूरी कोशिश करूंगी । ’’
हां, तू कोशिश कर ले, न माने तो मेरा नाम ले कर कह देना, ‘आप अब शादी करो या न करो भैया भाभी को साथ ले कर ही जाएंगे ।
‘‘वाह भैया, आज तुम सचमुच बड़े हो गए हो ।’’
‘‘आफ्टर आल अब मैं एक पत्नी का पति हो गया हूं ।’’
‘‘ओके, भैया, अब हम लोग चलेंगे, आप लोगों का क्या प्रोग्राम है?’’
‘‘कुछ देर घूमघाम कर पहले रति को उस के घर छोडूंगा फिर अपने घर जाऊंगा ।’’
मेरे गले में बांहें डालते हुए मनोज ने शरारत से देखा, ‘‘हां, रति, अब क्या कहती हो, तुम्हारे संस्कार मुझे पति मानने को तैयार हैं या नहीं?’’
आंखें नचाते हुए मैं चहकी, ‘‘अब तुम नाइंटी परसेंट मेरे पति हो ।’’
‘‘यानी टैन परसेंट की अब भी कमी रह गई है…अभी और इंतजार करना पडे़गा?’’
‘‘उस दिन का मुझे अफसोस है मनोज…पर अब मैं तुम्हारी हूं । ’’

 

प्यार का चसका

शहर के कालेज में पढ़ने वाला अमित छुट्टियों में अपने गांव आया, तो उस की मां बोली, ‘‘मेरी सहेली चंदा आई थी।
वह और उस की बेटी रंभा तुझे बहुत याद कर रही थीं। वह कह गई है कि तू जब गांव आए तो उन से मिलने उन के गांव आ जाए, क्योंकि रंभा अब तेरे साथ रह कर अपनी पढ़ाई करेगी।
यह सुन कर दूसरे दिन ही अमित अपनी मां की सहेली चंदा से मिलने उन के गांव चला गया था।
जब अमित वहां पहुंचा, तो चंदा और उन के घर के सभी लोग खेतों पर गए हुए थे. घर पर रंभा अकेली थी। अमित को देख कर वह बहुत खुश हुई थी।
रंभा बेहद खूबसूरत थी। उस ने जब शहर में रह कर अपनी पढ़ाई करने की बात कही, तो अमित उस से बोला, ‘‘तुम मेरे साथ रह कर शहर में पढ़ाई करोगी, तो वहां पर तुम्हें शहरी लड़कियों जैसे कपड़े पहनने होंगे
वहां पर यह चुन्नीवुन्नी का फैशन नहीं है,’’ कह कर अमित ने उस की चुन्नी हटाई, तो उस के हाथ रंभा के सुडौल उभारों से टकरा गए
उस की छुअन से अमित के बदन में बिजली के करंट जैसा झटका लगा था।
ऐसा ही झटका रंभा ने भी महसूस किया था।
वह हैरान हो कर उस की ओर देखने लगी, तो अमित उस से बोला, ‘‘यह लंबीचौड़ी सलवार भी नहीं चलेगी।
वहां पर तुम्हें शहर की लड़की की तरह रहना होगा।
उन की तरह लड़कों से दोस्ती करनी होगी।
उन के साथ वह सबकुछ करना होगा, जो तुम गांव की लड़कियां शादी के बाद अपने पतियों के साथ करती हो,’’ कह कर वह उस की ओर देखने लगा, तो वह शरमाते हुए बोली, ‘‘यह सब पाप होता है.’’।
‘‘अगर तुम इस पापपुण्य के चक्कर में फंस कर यह सब नहीं कर सकोगी, तो अपने इस गांव में ही चौकाचूल्हे के कामों को करते हुए अपनी जिंदगी बिता दोगी,’’ कह कर वह उस की ओर देखते हुए बोला, ‘‘तुम खूबसूरत हो, शहर में पढ़ाई कर के जिंदगी के मजे लेना’।

इस के बाद अमित उस के नाजुक अंगों को बारबार छूने लगा।
उस के हाथों की छुअन से रंभा के तनबदन में बिजली का करंट सा लग रहा था. वह जोश में आने लगी थी।
रंभा के मांबाप खेतों से शाम को ही घर आते थे, इसलिए उन्हें किसी के आने का डर भी नहीं था।
यह सोच कर रंभा धीरे से उस से बोली, ‘‘चलो, अंदर पीछे वाले कमरे में चलते हैं.’’ यह सुन कर अमित उसे अपनी बांहों में उठा कर पीछे वाले कमरे में ले गया ।
कुछ ही देर में उन दोनों ने वह सब कर लिया, जो नहीं करना चाहिए था
जब उन दोनों का मन भर गया, तो रंभा ने उसे देशी घी का गरमागरम हलवा बना कर खिलाया।
हलवा खाने के बाद अमित आराम करने के लिए सोने लगा।
उसे सोते हुए देख कर फिर रंभा का दिल उसके साथ सोने के लिए मचल उठा ।
वह उस के ऊपर लेट कर उसे चूमने लगी, तो वह उस से बोला, ‘‘तुम्हारा दिल दोबारा मचल उठा है क्या?’’
‘‘तुम ने मुझे प्यार का चसका जो लगा दिया है,’’ रंभा ने अमित के कपड़ों को उतारते हुए कहा
इस बार वे कुछ ही देर में प्यार का खेल खेल कर पस्त हो चुके थे, क्योंकि कई बार के प्यार से वे दोनों इतना थक चुके थे कि उन्हें गहरी नींद आने लगी थी।
शाम को जब रंभा के मांबाप अपने खेतों से घर लौटे, तो अमित को देख कर खुश हुए ।
रंभा भी उस की तारीफ करते नहीं थक रही थी। वह अपने मांबाप से बोली, ‘‘अब मैं अमित के साथ रह कर ही शहर में अपनी पढ़ाई पूरी करूंगी । ’’
यह सुन कर उस के पिताजी बोले, ‘‘तुम कल ही इस के साथ शहर चली जाओ । वहां पर खूब दिल लगा कर पढ़ाई करो । जब तुम कुछ पढ़लिख जाओगी, तो तुम्हें कोई अच्छी सी नौकरी मिल जाएगी. तुम्हारी जिंदगी बन जाएगी । ’’
‘‘फिर किसी अच्छे घर में इस की शादी कर देंगे. आजकल अच्छे घरों के लड़के पढ़ीलिखी बहू चाहते हैं,’’ रंभा की मां ने कहा, तो अमित बोला, ‘‘मैं दिनरात इसे पढ़ा कर इतना ज्यादा होशियार बना दूंगा कि फिर यह अच्छेअच्छे पढ़ेलिखों पर भारी पड़ जाएगी । ’’
रंभा की मां ने अमित के लिए खाने को अच्छेअच्छे पकवान बनाए। खाना खाने के बाद बातें करते हुए उन्हें जब रात के 10 बज गए, तब उस के सोने का इंतजाम उन्होंने ऊपर के कमरे में कर दिया।
जब अमित सोने के लिए कमरे में जाने लगा, तो चंदा रंभा से बोली, ‘‘कमरे में 2 पलंग हैं। तुम भी वहीं सो जाना. वहां पर अमित से बातें कर के शहर के रहनसहन और अपनी पढ़ाईलिखाई के बारे में अच्छी तरह पूछ लेना। ’’
यह सुन कर रंभा मुसकराते हुए बोली, ‘‘जब से अमित घर पर आया है, तब से मैं उस से खूब जानकारी ले चुकी हूं।
पहले मैं एकदम अनाड़ी थी, लेकिन अब मुझे इतना होशियार कर दिया है कि मैं अब सबकुछ जान चुकी हूं कि असली जिंदगी क्या होती है?’’
यह सुन कर चंदा खुशी से मुसकरा उठी. वे दोनों ऊपर वाले कमरे में सोने चले गए थे ।
कमरे में जाते ही वे दोनों एकदूसरे पर टूट पड़े. शहर में आ कर अमित ने रंभा के लिए नएनए फैशन के कपड़े खरीद दिए, जिन्हें पहन कर वह एकदम फिल्म हीरोइन जैसी फैशनेबल हो गई थी ।
अमित ने एक कालेज में उस का एडमिशन भी करा दिया था ।
जब उन के कालेज खुले, तो अमित ने अपने कई अमीर दोस्तों से उस की दोस्ती करा दी, तो रंभा ने भी अपनी कई सहेलियों से अमित की दोस्ती करा दी।
गांव की सीधीसादी रंभा शहर की जिंदगी में ऐसी रम गई थी कि दिन में अपनी पढ़ाई और रात में अमित और उस के दोस्तों के साथ खूब मौजमस्ती करती थी।
जब रंभा शहर से दूसरी लड़कियों की तरह बनसंवर कर अपने गांव जाती, तब सभी लोग उसे देख कर हैरान रह जाते थे।
उसे देख कर उस की दूसरी सहेलियां भी अपने मांबाप से उस की तरह शहर में पढ़ने की जिद कर के शहर में ही पढ़ने लगी थीं ।
अब अमित उस की गांव की सहेलियों के साथ भी मौजमस्ती करने लगा था । उस ने रंभा की तरह उन को भी प्यार का चसका जो लगा दिया था ।

 

किस्मत वालों को मिलता है सच्चा प्यार

नमन न्यू यॉर्क अपने बिजनेस मीटिंग के लिए गया था और अब वहा का सारा काम ख़तम कर के आज इंडिया लौटा था।
नमन मुंबई एयरपोर्ट पर इंतजार कर रहा था अपने ड्राइवर का क्युकी उसके ड्राइवर ने बोला था कि वो एयरपोर्ट पिक करने के लिए आने वाला है, काफी टाइम हो गया था लेकिन वो नहीं आया और ना ही उसका कॉल लग रहा था, कुछ देर बाद नमन का फोन भी स्विचऑफ हो गया क्युकी चार्ज नहीं था।
इंतज़ार करते करते बहोत टाइम हो गया था तो म नमन ने सोचा कि वो टैक्सी से ही चला जाए फिर वो अपना सारा सामान ले कर एयरपोर्ट से बाहर निकला और टैक्सी की राह देख रहा था कि कोई आए, तभी एक टैक्सी आते देख नमन उसे हाथ दिखा कर रोका और जैसे ही बैठने गया तो एक लड़की दूसरे साइड से टैक्सी में बैठ गई, नमन ने कहा कि ये टैक्सी उसने रोकी है तो वो बोली तो क्या हुआ बैठी तो मै पहले ना आप दूसरी टैक्सी लेलो,नमन फिर उससे कहा कि आपको किस तरफ जाना है उसने कहा मै कहीं भी जाऊ आपको उससे क्या मतलब, उसका ये सब सुन के नमन को थोड़ा गुस्सा आने लगा “एक तो मै कबसे इंतजार कर रहा हूं ड्राइवर नहीं आया मेरा और ये इधर मुझसे बेहस कर रही है।”
फिर नमन भी टैक्सी में बैठ गया और बोला भईया चलो, वो लड़की ज्यादा कुछ नहीं बोली और आगे चल के उसका घर आ गया तो वो नमन से पहले ही उतर गई, और नमन आगे निकाल गया टैक्सी में, फिर जब नमन को प्यास लगा तो वो पानी पीने के लिए पीछे वाले सीट से पानी की बोतल लेने गया तो देखा उधर एक छोटा सा हंड पर्स था, जिसमें एक पैन कार्ड आधार कार्ड और एक छोटी सी डायरी थी।
वो पर्स उस लड़की का था नमन ने ड्राइवर को बोला कि देखो ये उस लड़की का पर्स इधर छूट गया है तुम इससे पुलिस स्टेशन में जाके जमा कर देना फिर वो ड्राइवर बोलने लगा कि “नहीं साहब मै नहीं पड़ना चाहता ये पुलिस के चक्कर में वो दस सवाल पूछते है बार बार पोलिस स्टेशन बुलाते है मैं टेहेरा एक ड्राइवर, दिन भर गाड़ी चला के कुछ पैसे कमाता हूं अगर पुलिस स्टेशन के ही चक्कर काटते रह गया तो खाऊंगा क्या, साहब ये काम आप ही कर दो आप पुलिस स्टेशन जाके जमा कर देना।
फिर नमन ने सोचा ठीक है “मै एक जिमेदर नागरिक होने के कारण ये तो कर ही सकता हूं।” और फिर नमन का घर आ गया नमन ड्राइवर को उसका भाडा दे कर उतर गया।
नमन के घर में नमन अलावा उसके मम्मी पापा रहते है, नमन उनसे मिला उनका हाल चाल लिया और पूछा कि “ड्राइवर आया क्यों नहीं एयरपोर्ट पर मुझे लेने” तो मां ने बताया कि रास्ते में गाड़ी खराब हो गई तो उसने तुम्हे कॉल किया लेकिन तुम्हरा फोन ऑफ था तो उसने घर पर कॉल कर के बताया की वो गाड़ी ठीक करवाने के लिए जा रहा है, नमन ने कहा ठीक है और अपने कमरे में चला गया आराम करने। जब नमन शाम को सो कर उठा तो अपना कमरा ठीक करने में जुट गया जो कि बहोत बिखरा हुआ था, तभी नमन को वो उस लड़की का पर्स दिखा जो उससे गाड़ी में मिला था। नमन ने उसे खोला तो उसमे डायरी था उसे निकाल के देखा, उसमे कुछ फोन नंबर लिखे हुए थे। उसमे एक नाम था नीतू नमन ने उस नंबर पर कॉल किया और उससे बोला कि “मुझे एक पुर्स मिला गाड़ी में जिसमें ये डायरी है, उसमें तुम्हारा नाम है और एक पैन कार्ड और आधार कार्ड भी है”, उसने पूछा कि “आधार कार्ड पर नाम क्या है” नमन आधार कार्ड पर देखा और बोला “अनिशा “, तो सामने से वो लड़की बोली हा ये मेरी दोस्त का पर्स है वो मुझे बोली थी कि उसका पुर्स कहीं खो गया है, मै उसे बता देती हूं, और आपका नंबर भी दे देती हूं वो आपको कॉल कर लेगी नमन ने कहा ठीक है।
थोड़ी देर बाद एक नंबर से कॉल आता है, फोन उठाते ही सामने से एक लड़की बोलती हैं “मेरा पुर्स आपके पास है?” नमन ने कहा “आप कोन”, तो वो बोली “वही जिसका पुर्स आपके पास है जिसमें मेरा कुछ बहोत ज़रूरी सामान है,’ नमन ने कहा “हा मेरे पास है तुम उसे टेक्सी में भूल गई थी।” वो बोली “हां, कल आप मुझे डेली कैफ में मिल कर उसे लौटा सकते हैं?” मैंने कहा “हां”, वो थैंक्यू बोल कर कॉल रख दी।
अगले दिन नमन कैफे गया उसका पर्स लौटाने के लिए। नमन सही टाइम पर पहुंचा था लेकिन अनिशा लेट थी नमन रुका था उसके लिए। कुछ देर बाद वो आई, आज वो बिलुक अलग ही लग रही थी कल से, उसके लंबे घने बाल थे जो खुले हुए थे उसने सफ़ेद और नीले रंग का सलवार कुर्ता पहना था कनो में सुंदर से झुमके भी थे नमन उसे बस देखता ही रह गया वो धीरे धीरे नमन कि तरफ चली जा रही थी, नमन का ध्यान ही नहीं था वो बस उसे देखे जा रहा था फिर वो बोली “हेल्लो ध्यान कहा ह आपका मै कुछ पूछ रही हूं।”
तो नमन जल्दी से उठ गया और बोला “हां आओ मै तुम्हारा ही वेट कर रहा था” वो बोली “हां सोरी मुझे थोड़ा लेट हो गया”, नमन बोला “कोई नहीं ठीक है” फिर नमन ने कहा “कॉफी?” वो बोली “सॉरी अभी नहीं मै थोड़ी जलदी में हूं आप मेरा पुर्स देदो मुझे जाना है” नमन ने कहा “हां दे दुंगा थोड़ा बैठ के कुछ बात तो कर ही सकते है”, वो बोली “ज़रूर लेकिन आज नहीं फिर कभी”, मैंने कहा “ठीक है लेकिन याद रखना अपनी बात अगली बार साथ में बैठ के कॉफी पीना पड़ेगा फिर मत कहना आज भी जल्दी में हूं” वो बोली “हां ठीक है अब मेरा पर्स देदो”, नमन ने उसका पर्स दे दिया और बोला “मैं तुम्हे कॉल कर सकता हूं ना अगली बार मिलने के लिए” वो बोली “हां” और चली गई।
नमन कुछ देर वहां रुका और फिर ऑफिस चला गया, नमन पूरी रात अनिशा क बारे में ही सोचता रहा, नमन उसे भूल ही नहीं पा रहा था, नमन को उसकी एक एक बात याद आ रही थी।
अगले दिन नमन के कुछ दोस्त मिले और वो उसे बोलने लगे कि “चल आज पार्टी करते है बहोत दिन हो गए है हम दोस्तो ने साथ में पार्टी नहीं किया है”, नमन ने कहा “ठीक है सब चल रहे है तो मै भी चलता हूं,?”, फिर वो 5 दोस्त एक क्लब में गए, सब वहां बहोत नाचे साथ में, फिर थोड़ा ड्रिंक भी किया तभी नमन की नजर एक लड़की पर गई जो लगातार बहोत ड्रिंक कर रही थी, नमन ने ध्यान से देखा तो वो और कोई नहीं अनिशा थी, आज वो बहोत ही अलग लग रही थी, कहां उस दिन जब वो नमन से मिली थी तो सलवार कुर्ते में आई थी और आज वो शॉर्ट स्कर्ट और टॉप में है और ड्रिंक कर रही है, नमन तो बिल्कुल ही चौक गया उसे देख कर, नमन उसके पास जा ही रहा था उस से बात करने के लिए की तब तक उसके दोस्त उसका हाथ पकड़ा कर डांस करने के लिए ले कर गए, नमन की नजर अनिशा पर ही थी लेकिन थोड़ी ही देर में वो वहा से कहीं चली गई।
फिर नमन ने उसे क्लब में इधर उधर धुंडा लेकिन वो नहीं मिली ।
घर जा कर नमन उसे कॉल किया, वो कॉल भी नहीं उठा रही थी, नमन उसे बहोत बार कॉल किया लेकिन उसने नमन का एक भी कॉल का जवाब नहीं दिया।
अगले दिन फिर नमन उसी टाइम पर क्लब गया ताकि अगर वो आज आई तो वो उधर ही उससे पूछ लेगा, नमन अंदर जा कर वेट कर रहा था लेकिन वो नहीं आई आज, फिर नमन ने उसे कॉल किया इस बार उसने कॉल उठाया, कॉल उठाते ही नमन उस से पूछा “कहा हो तुम” वो बोली “क्यों क्या हुआ”, मैंने उससे बोला कि “कल मैंने तुम्हे क्लब में देखा था तुम हद से ज्यादा ड्रिंक कर रही थी, क्या हुआ है, तुम्हे कोई किसी बात का टेंशन है क्या”, वो बोली “नहीं और कॉल कट कर दी नमन फिर उसे कॉल लगाया तो उसने कॉल नहीं उठाया इस बार।
नमन वाहा से घर चला गया, घर आ कर उसने अनिशा को मेसेज किया की “अगर तुम्हें कोई किसी बात का टेंशन है तो मुझे बता सकती हो”, उसका कोई रिप्लाइ नहीं आया, 2 3 दिन हो चुके थे अभी तक अनिशा ने कुछ नहीं कहा था।
नमन फिर अनिशा को कॉल किया, उसने कॉल उठाया नमन ने बड़े आराम से बोला कि “तुमने कुछ रिप्लाइ नहीं दिया मेरे मेसेज का” वो चुप ही थी , नमन ने फिर बोला “ऐसे चुप नहीं रहो कुछ बोलो कुछ परेशानी हो तो बताओ मैं तुम्हारी मदत कर सकता हूं”, फिर नमन ने कहा “अच्छा चलो कल उसी कैफे में मिलो, तुम्हारा काफी बाकी है एक मुझ पे”, वो “हा ठीक है” बोल कर कॉल रख दी।
नमन बड़ी बेचैनी से कल का इंतजार कर रहा था।
अगले दिन वो सुबह सुबह उठा अच्छे से तैयार हो कर अनिशा से मिलने के लिए निकला, आज नमन खुद टाइम से पहले आ कर इंतजार कर रहा था, थोड़ी ही देर में अनिशा आई वो बहोत सुंदर दिख रही थी आज उसने जींस टॉप पहना था और बाल वैसे ही खुले थे वो जैसे – जैसे आगे आ रही थी चल के उसके बाल उसकी आंखों के तरफ आ रहे थे वो उन्हें ठीक करती हुई आ रही थी, वो आ के नमन के सामने वाले कुर्सी पर बैठ गई, वो शांत थी नमन ने पूछा “कॉफी” वो हॉकी सी मुस्कुराहट के साथ बोली “हा”।
नमन ने वेटर को कॉफी के लिए बोला और अनिशा से बोला “चलो अब बताओ क्या बात है जिससे तुम परेशान हो”, पहले तो वो कुछ नहीं बोल रही थी फिर नमन ने कहा बोलो कुछ, वो बोली कि “मै मुंबई में अकेले रहती हूं यहा मै अपना कैरियर बनाने के लिए आई हूं…” ये बोलते बोलते वो चुप हो गई, मैंने कहा “हां आगे बोलो इसमें क्या हुआ ये तो अच्छी बात है तुम अपने कैरियर पे इतना ध्यान दे रही हो”, फिर वो बोली “लेकिन अब नहीं हो पा रहा है, मेरा काम में बिल्कुल ध्यान नहीं रहता मुझे अपने बॉस से बहोत बार अब डाट सुन नी पड़ती है और उसने तो ये तक केह दिया है कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो वो मुझे नौकरी से निकाल देगा, 2 महीने हो गए है मेरे इस वार्ताओं से मुझे रोज़ डाट सुनी पड़ती है”।
मैंने उसे पूछा “ऐसा क्या हो गया है कि तुम इतनी परेशान रह रही हो”, वो चुप हो गई फिर से, फिर थोड़ी देर बाद बोली “मुझे कैंसर हो गया है”।
ये सुन कर नमन घबरा गया आगे वो बोलती रही, “2 महीने पहले मैंने चेकअप करवाया था तो डॉक्टर्स ने बोला कि मुझे कैंसर हो गया है अभी सेकंड स्टेज पर है, ये सुन कर मैं तबसे परेशान रहती हूं कि कैसे मै सब करूंगी मेरा इस दुनिया में कोई नहीं है बचपन से ही मै अनाथ हूं बस कुछ ऑफिस के दोस्त है, मै ये बात अपने ऑफ़िस में भी नहीं बता सकती कि अगर बॉस को पता चला तो वो मुझे कहीं नौकरी से निकाल ना दे, 3 महीने पहले ही मेरा प्रोमोशन हुआ है मुझे हेड ऑफ द डिपार्टमेंट बनाया है, और ये सब हो गया मै अब क्या करू कुछ समझ नहीं आ रहा है”।
ये सब सुन कर नमन ने धीरे से उसका हाथ अपने हाथ में लिया और बोला “तुम अकेले नहीं हो मै तुम्हारे साथ हूं”, वो चुप चाप नमन की ओर देखने लगी, नमन ने कहा “हां तुम सही सुन रही हो मै तो उसी दिन से तुम्हे पसंद करने लगा था जिस दिन तुम अपना पर्स लेने के लिए मुझसे मिलने आई थी” ये सुन कर उसने अपना हाथ पीछे कर लिया नमन ने पूछा “क्या हुआ हाथ क्यों हटा लिया तुमने”, वो बोली “नहीं ये सब ठीक नहीं है मेरी ज़िन्दगी का ही भरोसा नहीं है और मै तुम्हे मेरे वजह से कोई परेशानी नहीं दे सकती”, नमन उसे प्यार से समझाया कि “नहीं !
तुम मुझे कोई परेशानी नहीं दे रही हो मै तुम्हारा ध्यान रखना चाहता हूं तुम्हे अपनी ज़िन्दगी का हिस्सा बनाना चाहता हूं मै हमेशा तुम्हारे साथ रहूंगा, कभी तुम्हे अकेला नहीं छोडूंगा”, वो बोली “नहीं तुम समझो कल को पता नहीं मैं रहूं या ना रहूं तुम क्यों खुद को किसी की परेशानी में डाल रहे हो”, नमन उसे बहोत समझाया लेकिन वो नहीं मानी और चली गई, नमन उसके पीछे गया उसका हाथ पकड़ के रोका और उससे कहा “तुम्हें कभी भी किसी की जरूरत हो तो मै हमेशा तुम्हारे साथ रहूंगा” और फिर अनिशा चली गई, नमन उसे रोज़ उसका हाल पूछता था, वो डॉक्टर के पास चेकअप के लिए गई की नहीं टाइम पर सब दवाइयां ले रही है कि नहीं, उस दिन के बाद नमन ने कभी उसे अकेला नहीं महसूस होने दिया, नमन उसे रोज़ फोन करता था उसका हाल पूछता था 4 महीने हो चुके थे ऐसे बात करते करते।
एक दिन शाम को फोन पर बात करते करते अनिशा बेहोश हो गई नमन उसे पुकारता रहा लेकिन वो कुछ नहीं बोल रही थी, नमन तुरंत उसके घर जाने के लिए निकल गया उधर पहुंचा तो देखा कि अनिशा के घर पर कोई नहीं था फिर उसके पड़ोसियों से पूछा तो पता चला वो उसे हॉस्पिटल ले कर गए है मै तुरंत हॉस्पिटल पहुंचा इंक्वायरी डेस्क पर उसके बारे में पता किया और उसके रूम के तरफ गया, वह 2,3 लोग खड़े थे जो अनिशा को हॉस्पिटल ले कर आए थे ।
नमन उनसे पूछा कि “क्या हुआ अनिशा को” तो वो बोले कि “अनिशा अपने घर में बेहोष हो के गिर गई थी वो तो उसके घर का दरवाज़ा थोड़ा खुला था तो एक बच्चे को बॉल खेलते खेलते उसके घर में चला गई तो हमने जा कर देखा ये बेहोश पड़ी थी,अनिशा अकेले रहती है यह, तो हम उससे हॉस्पिटल ले कर आए”। तभी आईसीयू से एक डॉक्टर बाहर आए और बोले अनिशा की हालत खराब है हमें उसका ऑपेरशन करना पड़ेगा, नमन ने पूछा ऑपरेशन के बाद अनिशा बिलुकुल ठीक हो जाएगी ना, डॉक्टर ने कहा अभी कुछ बोल नहीं सकते, नमन ने कहा डॉक्टर आप ऑपरेशन की तयारी कर लीजिए और पैसे की कोई फिकर ना करे, ये सुन कर डॉक्टर चले गए।
पूरे 5 घंटे बाद ऑपरेशन रूम से डॉक्टर बाहर आए।
नमन जल्दी से डॉक्टर के पास गया और पूछा “अनिशा कैसी है”, डॉक्टर ने कहा “ऑपरेशन सक्सेसफुल हुआ घबराने की बात नहीं है कुछ”।
नमन के जान में जान आई, उसने पूछा “क्या मै अनिशा से मिल सकता हूं”, डॉक्टर ने कहा “अभी नहीं कुछ देर बाद” नमन ने कहा “ठीक है”। फिर नमन बाद में अनिशा से मिला वो नमन को देख कर रोने लगी।
नमन उसके पास बैठा था, उसने कहा कि “बोला था म मैंने मै हमेशा तुम्हारे साथ रहूंगा”। ये सुन कर अनिशा और रोने लगी नमन उसे चुप कराय और कहा “अभी अभी तुम्हारा ऑपरेशन हुआ है ऐसे में तुम्हे रोना नहीं चाहिए”, हम दोनों बहोत देर तक एक दूसरे का हाथ पकड़ा कर बैठे थे। फिर वो दोनो घर आए, नमन उसका बहोत ध्यान रखता था।
नमन ने अनिशा के बारे में अपने घर वालो को बता दिया था। तो अब वो अनिशा के साथ ही रहता था उसका ध्यान रखता था।
जब अनिशा पूरी तरह से ठीक हो गई, तब दोनों ने शादी करली और हमेशा के लिए दोनों एक साथ हो गए।

 

बिना गलती की सज़ा

अगर प्यार सच्चा हो, तो लोग बिछड़ कर भी मिल जाते है।
नित्या की शादी को लगभग एक साल भी नहीं हुए थे और उसका तलाक हो गया।
नित्या के घर वालों ने ज़बरदस्ती नित्या की शादी करवा दी थी। शादी के कुछ 3 महीने बाद ही उसके पति राकेश का वव्ह्यार बदल गया वो नित्या से हमेशा झगड़ा ही करता रहता था।
राकेश एक कंपनी में काम करता था, और रोज शाम को देरी से घर आता था, क्योंकि ऑफिस के बाद वो दारू पीने के लिए रुक जाता था, घर आकर वो नित्या से हर छोटी छोटी बात पर बहेस करता था उस खरी खोटी सुनता था, वो नित्या को ये भी बोल देता था कि “चली जा तू यहां से मुझे तेरी कोई ज़रूरत नहीं है बहुत मिल जाएंगी तेरी जैसी।”
नित्या उसका ये वव्ह्यार चुप चाप सेहन कर रही थी, उसने अपने घर पर भी इसके बारे में कुछ नहीं बताया था, वो अपने घर वालो से नाराज़ थी।
उन्होंने जबरदस्ती उसकी शादी जो करवाई थी, नित्या अविनाश से प्यार करती थी, और जब ये बात नित्या के घर वालो को पता चली तो उन्होंने जबरदस्ती उसकी शादी करवा दी।
अविनाश उस वक्त कुछ नहीं कर पाया क्योंकि नित्या के पापा ने अविनाश के खिलाफ पुलिस कंप्लेन क कर दिया था की वो नित्या को परेशान करता है, और इसी कारण वो कुछ दिनों के लिए जेल में था ये सब के बारे में नित्या को नहीं पता था।
नित्या अपनी शादी शुदा जिंदगी में बहुत परेशान थी। कुछ महीने ऐसा ही चलता रहा, राकेश थोड़ा भी नहीं बदला था। फिर नित्या ने सोचा कि अब वो और उस रिश्ते में नहीं रह सकती और उसने राकेश से तलाक लेना का फैसला कर लिया।
और फिर उनका तलाक हो गया।
तलाक के बाद नित्या ने अपने मम्मी पापा को सब कुछ बता दिया, और उन्होंने नित्या को बहुत डाटा की क्या हो गया था ऐसा की तलाक ले लिया अब क्या करेगी कहा जाएगी कौन करेगा इस से शादी, ये सब सुन कर नित्या ने उनके साथ रहने से इंकार कर दिया, वो एक छोटी सी कंपनी में काम करने लगी और कंपनी द्वारा दिए गए घर में रहती थी।
उसे कभी कभी अविनाश की बहुत याद आती थी, लेकिन उसने अविनाश से कभी संपर्क करने की कोशिश नहीं किया, वो सोचती थी कि अब उसे किसी पर बोझ नहीं बनना, वो अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती थी, वो अपना पूरा समय अपने काम को देती थी, उसका काम इतना अच्छा था कि 4 महीनों में ही उसका प्रोमोशन हो गया और वो अपने डिपार्टमेंट की हेड बन गई।
प्रमोशन के एक महीने बाद उसे उसकी कंपनी के तरफ से एक मीटिंग अटेंड करने के लिए विदेश जाने का अवसर मिला।
नित्या अपने काम में बहुत तरक्की कर रही थी, अब उसके मम्मी पापा को भी नित्या पर बहुत फक्र महसूस हो रहा था, अब वो पछताते थे कि उन्होंने उसकी शादी गलत घर में कर दिया था।
नित्या विदेश जाने की बात से बहुत खुश थी।
4 दिन बाद की उसकी टिकट थी।
उसे कुछ खरीदारी भी करनी थी, फिर वो अपने ऑफिस के पास एक मॉल में गई, उसे कपड़े और कुछ मेकअप का सामान लेना था, वो मॉल में घूम रही थी, कपड़े देख रही थी, तभी किसी ने पीछे से उसके कंधे पर हाथ रखा, वो पीछे मुड़ी देखने के लिए और वो बिल्कुल अपने आंखो पर विश्वास नहीं कर पा रही थी, वो इंसान और कोई नहीं अविनाश था।
नित्या उसे देखती रह गई उस समझ नहीं आया कि वो अविनाश से क्या बात करे, अविनाश नित्या को देख कर बहुत खुश हुआ। दोनों के आंखो में असू के साथ खुशी भी थी। अविनाश ने पूछा तुम यहां! अपने पति के साथ हो क्या? नित्या उस से नज़रे चुराते हुए बोली नहीं, अविनाश ने पूछा “कैसी हो?” नित्या उस से बात नहीं करना चाहती थी वो नहीं चाहती थी कि अविनाश को पता चले कि उसका तलाक हो गया है और अब वो अकेले रहती है।
अविनाश उस से पूछे जा रहा था, उसने बोला कुछ बोलो।
नित्या वहां से जाने लगी, उसने अविनाश को बोला कि मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी तुम चले जाओ।
अविनाश उसके पीछे पीछे जाने लगा, उसने कहा मेरी बात तो सुन लो एक बार, फिर भी नित्या नहीं रुकी।
फिर अविनाश ने कहा तुम्हें मेरी कसम है बस एक बार रुक के मेरी बात सुन लो, फिर नित्या क्या करती, आखिर उसके दिल में अभी भी अविनाश के लिए प्यार था, तो वो रुक गई फिर अविनाश ने कहा कि कहीं बैठ कर बात करते है फिर वो दोनों मॉल के एक रेस्टोरेंट में गए।
अविनाश ने उस से पूछा कैसी हो?, वो बोली ठीक हूं, अविनाश ने उसके पति के बारे में पूछा कि वो कैसा है तुम्हारा ध्यान रखता है ना।
नित्या चुप थी, अविनाश ने बोला क्या हुआ तुम चुप क्यों हो कुछ बोलो, तुम्हे कोई परेशानी तो नहीं है ना।
नित्या बोली मेरा तलाक हो गया है।
अविनाश को ये सुनते ही एक उम्मीद की किरण दिखने लगी, उसने पूछा कब और क्यों, नित्या ने उसे सब बताया। अविनाश ने बोला फिर अब तुम अकेले क्यों रहती हो, तुम अपने मम्मी पापा के पास क्यों नहीं गई या मुझे क्यों संपर्क करने की कोशिश क्यों नहीं की।
नित्या बोली “तुम अगर मुझसे प्यार ही करते थे तो जब मेरी शादी हुई तब क्यों नहीं आए मुझे लेने, कहा थे तुम? उस वक़्त मै बिल्कुल अकेली हो गई थी और मजबूरी में शादी हो गई मेरी।” अविनाश ने पूछा क्या तुम्हारे पापा ने नहीं बताया कि उन्होंने मुझपे पुलिस केस कर दिया था, मै जल में था कुछ महीने। ये सुनते ही नित्या चौक गई, उसने कहा कि मुझे इसके बारे में कुछ नहीं पता, अविनाश ने उसे पूरी बात बताई।
नित्या बोली मै माफी मांगती हूं तुमसे अपने पापा के तरफ से।
अविनाश ने कहा अब वो बात को जानेदो मै भूल चुका हूं वो सब, अभी की बात करो अविनाश ने बिना देर किए उसने पूछ लिया “क्या अब तुम मुझसे शादी करोगी।” नित्या बोली “क्या तुमने अभी तक शादी नहीं की।” अविनाश ने कहा नहीं, मै अभी अपने कैरियर पे ध्यान दे रहा हूं, और यह कुछ काम से ही आया था, अब बोलो शादी करोगी मुझसे।
नित्या बोली अभी 2 दिन में मै अपने कंपनी के तरफ से विदेश जा रही हूं एक मीटिंग के लिए। उधर से लौट कर इसके बारे में बात करते है। अविनाश ने कहा पहले ही बहुत इंतजार किया है अब और इंतजार नहीं होता है लेकिन फिर भी जैसा तुम कहोगी वैसा ही होगा। दोनों ने अपना फोन नंबर दिया एक दूसरे को और घर गए। अविनाश उसे रोज फोन कर के उसका हाल चाल पूछता रहता था।
एक सप्ताह बाद नित्या अपनी मीटिंग ख़तम कर के लौट आई थी।
अविनाश उसे मिलने के लिए बोल रहा था लेकिन नित्या अपने ऑफिस में बहुत व्यस्त रहती थी, उसने कहा कि हम रविवार को मिलेंगे। फिर वो दोनो रविवार को उसी मॉल में मिले। अविनाश ने पहले उसके मीटिंग और काम के बारे में पूछा कि सब ठीक चल रहा है ना। नित्या ने कहा हा सब ठीक है। फिर अविनाश ने उस से शादी का पूछा, तुमने कहा था कि आके बताओगी शादी करोगी की नहीं तो अब बोलो क्या सोचा है।
नित्या तो अविनाश से प्यार करती ही थी और अब उसे मौका मिला था अपने प्यार के साथ पूरी ज़िन्दगी बिताने का, उसने हा कह दिया।
दोनों बहुत खुश थे। नित्या ने अपने घर पर अविनाश के बारे में सब कुछ बता दिया और इस बार उसके घर वाले उसके इस फैसले से मान गए क्योंकि पहले उनसे एक गलती हो चुकी थी अब वो फिर से अपनी बेटी को तकलीफ में नहीं देखना चाहते थे।
एक महीने बाद उनके परिवार ने उनकी शादी करवा दी।
अविनाश ने अपना खुद का एक बिजनेस स्टार्ट किया था तो अब नित्या उसके साथ उसके बिजनेस में हाथ बटाती थी, और वो दोनों खुशी खुशी हमेशा के लिए एक साथ हो गए।

 

कॉलेज में हुआ प्यार

अंकिता और विनय एक ही कॉलेज में पढ़ते थे ।
दोनों केे एक कॉमन फ्रेंड ने उनकी मुलाक़ात करवाई थी ।
पूरा ग्रूप साथ में घूमते फिरते खाते पीते रहते थे ।
पर अंकिता और विनय की नज़दीकीया बड़ने लगी ।
देखते ही देखते उनको एक दूसरे से प्यार हो गया ।
अब वह दोनों अकेले वक़्त बीताने लगे ।
भाग में घूमना,साथ में मूवी देखने जना, साथ में पढ़ना वह हर चीज़ एक साथ ही करते थे।
देखते ही देखते कॉलेज ख़त्म हो गया और उनका मिलना भी कम होगया।
एक बार अंकिता और विनय दोनों एक समुद़ कीनारे बैठे थे।
अंकिता ने विनय से कहाँ “अब तो हमारी कालेज भी ख़त्म हो गई है अब हम एक दूसरे के साथ वक्त कैसे बिंतागे और अब जल्द ही मेरे घर वाले मेरी शादी करवा देंगे!”
विनय ने उसका हाथ पकड़ते हुए कहा की”अंकिता तुम चिंता मत करो मेने एक दो कम्पनी में अपलाये कर दिया है बस कुछ ही दिनों में में अच्छी नौकरी पर लग जाउगा फिर हम अपने अपने घर में बता देंगे.”
दो हफ्ते बाद ही विनय को अच्छी कंपनी में नौकरी मिल गई ।
जैसे की उन्होंने तय किया था ।
उन्होंने अपने अपने घर पे बता दिया ।
विनय की माँ तो मान गई पर उसके पीता जी नहीं मान रहे थे ।
और यहाँ अंकिता के घर वालो ने तोह साफ़ साफ़ इंकार ही कर दिया था ।
वह दोनों बहुत परेशान होने लगे की अब क्या होगा ??
कैसे वह अपने घर वालो को मनांगे ??
बहुत दिन हो गये दोनों का एक दूसरे से बात करना भी कम हो गया था क्यूंकी अंकिता के घर वालो ने उसका फ़ोन ले लिया था और उसके लिए रिश्ता ढूंढ रहे थे।
वह कभी कभी अपनी सहेली केे घर जाती तभी विनय को फ़ोन कर पाती थी और बस हमेशा यही कहती की विनय तुम जल्दी ही कुछ करो वरना मेरी शादी हो जाएगी में तुमसे बहुत प्यार करती हूं तुम्हारे बिना नहीं रह पाउंगी ।
विनय भी उससे हमेशा आश्वासन देता था ।
पर उससे भी नहीं समझ रहा था की वह क्या करे??
कैसे अपने घर वालो को मनए??
यही सोचते सोचते वक़्त बीतते जा रहा था।
दोनों बहुत परेशान रहने लेगे ।
विनय घर पे न कुछ खाता था न ही बात करता था बस पूरा दिन शांत शांत रहता था ।
यह देख कर उसकी माँ से रहा नहीं गया और उसने अपने पति को समझाया की मुझे मेरे बेटी की ख़ुशी से बढ़ कर कुछ नहीं है और अब अगर उसकी शादी होगी तो अंकिता से ही होगी आप कल ही उसके घर जाके उसके माँ बाप से बात करो।
अगले ही दिन विनय केे पापा अंकिता के घर गए और अंकिता के माँ बाप से बात की और उन्हें समजाया की हमारे बच्चों की ख़ुशी में ही हमारी ख़ुशी होगी। मेरा बेटा एक अच्छी कंपनी में काम करता है और उसकी तनख्वाह भी अच्छी है वह आपकी बेटी को खुश रखेगा ।
विनय केे पिता जी की बात सुनकर अंकिता के माँ-बाप मान गये और शादी के लिए राज़ी हो गये।
विनय और अंकिता की शादी धूम धाम से हुई ।
दोनों बहुत खुश थे। वह अपने हनीमून के लिए शिमला गये ।
हनीमून से लौटते ही विनय अपने काम पे लग गया दोनों की ज़िन्दगी हसी ख़ुशी बीत रही थी। उनकी शादी को अब दो साल होने वाले थे
पर उन्हें अभी तक बच्चा नी हुआ था। घर वाले रिश्तेदार सब लोग अंकिता से हमेशा यही सवाल पूछते थे की खुश खबरी कभी दे रही हो पर वह हमेशा मुस्कुरा कर बात ताल देती थी।
विनय और अंकिता भी बच्चा चाहते थे पर उन्हें हो नहीं रहा था। बहुत डॉक्टरो को दिखाया सब टेस्ट भी करवाई लेकिन कुछ फ़ायदा नहीं हुआ। अंकिता की सास उससे बाबा के पास भी ले गई पर वहां se भी सर्फ नीराशा ही हाथ आई ।
अंकिता बहुत परेशान थी । उससे यही चिंता खाये जा रही थी की वह कभी माँ नहीं बन पाएगी!
4 साल बीत गये पर उन्हें अभी तक बच्चा नहीं हुआ!
एक दिन विनय ऑफिस से लौट तो उसकी माँ उससे चिल्लने लगी की तूने अपनी मर्ज़ी से शादी की अब देख रहा है ना बच्चा भी नी होरा अब हमारा वंनश आगे कौन बढ़ायेगा???
लोगो के ताने सुन सुन कर मेरे कान पक गये है आखिर हमे भी इच्छा होती है की अपने पोते पोतियो को देखे
यह सब अंकिता सुन रहीं थी । विनय ने अपनी माँ को समझाया की जरुरी नहीं की आपकी बाहु में ही कुछ कमी हो मुझमें भी तो हो सकती है आप शांत हो जाइये जैसे तैसे उसने अपनी माँ को चुप करवाया और अपने रूम में चले गया जहा अंकिता वहा बहुत रो रही थी।
विनय उसके पास गया और उससे गेल लगा कर कहने लगा । तुम चिंता मत करो सब ठीक होगा में हु ना तुम्हारे साथ में तम्हारा साथ कभी नहीं छोडूंगा ।
और माँ की बात का बुरा मत मानो वो ऐसे ही कहते है गुस्से में जाने दो खाना लगा दो हम साथ में खाते है । अंकिता थोड़ा शांत हुई और खाना लेकर आई दोनों ने साथ में खाना खाया और सोने लगे पुरी रात अंकिता यही सोचती रही की कैसी औरत हु में जो अपने पति को बच्चा भी नहीं दे पारी अपना वंश को आगे नहीं बड़ा पारी कितनी बदनसीब हु मैं ।
वह पूरी रात नहीं सोइ और बस रोये जा रही थी। सुबह हुई सब अपने अपने काम में लग गये । विनय भी ऑफिस के लिए निकल गया अंकिता भी अपना काम करने लगी पर उसके दिमाग में वही रात वाली बात चल रही थी। पूरा दिन यही सोचती रही ।
रात को जब विनय घर आया तो अंकिता ने उससे खाना दिया और वह दोनों अपने कमरे में सोने की तैयारी कर रहे थे की तब अचानक अंकिता ने विनय से कहा की क्यों न हम एक बच्चा गोद ले ले अब हमे तो बच्चा नहीं होरा क्यों ना हम किसी बच्चे को गोद ले और उससे माँ बाप का सूख दे और हमें भी बच्चे का सुख मिल जाएगा? विनय ये बात सुन कर बहुत खुश हुआ ।
वह दोनों दूसरे ही दिन एक दत्तक ग्रहण संसथा गये और वहा पुरी बात बताई । दत्तक ग्रहण संसथा वालो ने कहा की आप एक फॉर्म बर दीजिये जैसे जैसे ही सब जाच परताल हो जायगी आपको फ़ोन आजायेगा । उन्होंने फॉर्म भरा और एक आशा के साथ घर लोटे की शायद अब उनकी परेशानी दूर हो जाएगी ।
6 महीने हो गये उनको कॉल नी आया । विनय जबी वहा जाता वह लोग उससे एक ही जवाब देते की कॉल आजायेगा पर इंतज़ार की गाड़ीया बढ़ति जारी थी।
अब अंकिता हिम्मत हार चुकी थी वो पूरी तरह से टूट चुकी थी विनय भी आखिर कितना उसको समझा पाता दोनों थक चुके थे उन्हें अभी कोई उम्मीद ही नहीं रही थी की वह कभी माँ बाप बन पायेगे।
पर विनय ने अंकिता का साथ और कोशिश करना नहीं छोड़ा वह हर दो दिन में संसथा जाता था ।
इंतज़ार करते करते 8 महीने होगये थे। और एक दिन अचानक विनय को कॉल आता है की आप दत्तक ग्रहण संसथा में आजाये आपके लिए एक ख़ुश खबर है। उसने तुरंत अंकिता को फ़ोन करके दत्तक ग्रहण संसथा आने के लिए कहा
दोनों वहां पहुचे तो उन्हें पता चला की उनको एक बेटी गोद दी जा रही है जो की सिर्फ 5 महीने की है विनय और अंकिता की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा विनय तो ख़ुशी केे मारे वही नाचने लगा ।
वह दोनों उस बच्ची को लेकर घर आये विनय की माँ ने उनका पूजा की थाली से सवागत किया उन्होंने उसका नाम किरन रखा (जैसे वह उनकी ज़िंदगी में अाशा की किरण हो)।
वह सब बहुत खुश थे आखिर उन्हें अपनी बेटी जो मिल गई थी और वह अच्छे से खुशहाल ज़िन्दगी जीने लगे ।
बस यही होता है प्यार जो हर वक़्त में तुम्हारा साथ दे और यक़ीन दिलाए की हमारी परेशानीया हमसे छोटी होती है और हमे कभी अपने ज़िंदगी में उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए विश्वास हो तो हम सब कुछ पा सकते हैं ।

 

वो प्यार नहीं था

सच्चा प्यार इस से साबित नहीं होता कि आप कितने लंबे समय से एक साथ है, सच्चा प्यार तब पता चलता है जब परिस्थितियां खराब चल रही हो और फिर भी आप एक दूसरे के साथ रहे, एक दूसरे को सपोर्ट करे और ज़िन्दगी में साथ आगे बढ़े।
रूबी एक फैशन डिजाइनर थी, और नितिन एक कंपनी में सल्स मैनेजर का काम करता था।
रूबी और नितिन एक दूसरे को कॉलेज से जानते थे और एक दूसरे से प्यार करते थे।
उनके रिलेशन को लगभग 6 साल हो गए थे और अब रूबी नितिन से शादी करना चाहती थे।
पिछले महीने नितिन का प्रोमोशन हुआ था, तो इसी कारण उसे दूसरे शहर में शिफ्ट होना पड़ा था।
जाने से पहले वो रूबी से मिला था। रूबी बहुत उदास थी कि अब वो दोनो मिल नहीं पाएंगे, लेकिन रूबी ने नितिन को कभी माना नहीं किया जाने से वो चाहती थी नितिन अपने कैरियर में आगे बढ़े और यही सोच कर उसने खुशी खुशी नितिन को जाने दिया था।
वो दोनो एक दूसरे को रोज़ फोन करते थे और घंटो बाते करते थे, रूबी उस से उसके नए काम नई जगह के बारे पूछती रहती कि सब कैसा है उधर, वो समय पर खाना कहता है ना, काम में ध्यान लगता है ना, रूबी उसे उसका सब कुछ पूछती थी।
एक साल अच्छे से बित गए थे लेकिन फिर कुछ ऐसा होने लगा कि रूबी बहुत परेशान रहने लगी।
नितिन ना तो खुद रूबी को फोन करता था और जब रूबी फोन करती थी तो ये बोल कर फोन रख देता था कि वो काम में व्यस्त है।
रूबी को समझ नहीं आ रहा था कि नितिन ऐसा क्यों कर रहा है भले कितना भी काम हो पाच मिनट तो मुझसे बात कर ही सकता है।
एक महीना ऐसे ही चला गया, फिर रूबी थक कर नितिन को फोन करना छोड़ दी, और नितिन तो अब उसे खुद से फोन करता ही नहीं था।
कुछ दिन ऐसे ही बीत गए तो रूबी ने खुद फोन किया नितिन को, उसने फोन नहीं उठाया रूबी ने उसे 4,5 बार फोन किया फिर भी उसने फोन नहीं उठाया और ना ही उसने बाद में खुद रूबी को फोन किया।
रूबी बहुत परेशान हो गई वो सोचने लगी कि सच में नितिन काम में व्यस्त रहता है कि कुछ और बात है। कुछ दिनों बाद रूबी अपने काम से छुट्टी लेकर नितिन को बिना बताए उस से मिलने चली गई।
रूबी को नितिन का पूरा पता मालूम था कि वो कहा रहता है।
रूबी रात के समय नितिन के घर पहुंची थी, उसने देखा कि नितिन के घर पर ताला लगा हुआ था, उसने नितिन को फोन किया लेकिन हमेशा की तरह नितिन ने रूबी का फोन नहीं उठाया, फिर रूबी ने नितिन को मेसेज किया कि “मै तुम्हरे घर के बाहर खड़ी हूं तुम कहा हो?” थोड़ी देर बाद नितिन ने फोन किया और उसे बहुत डाटा की तुम बिना बताए क्यों आ गई इधर, किसने बोला था तुम्हें इधर आने के लिए,और फोन रख दिया।
उसने रूबी की कोई बात नहीं सुनी, रूबी उसके घर के बाहर ही बैठी रह गई कि शायद नितिन को ऑफिस में बहुत काम हो और मै बिना बताए आ गई इस लिए वो गुस्सा हो गया, और वो उसके घर के बाहर ही बैठ के उसका इंतज़ार कर रही थी। सफर में रूबी बहुत थक गई थी और उधर बैठे बैठे रूबी की आंख लग गई और वो सो गई।
सुबह उसकी आंख खुली तो उसने देखा कि नितिन अभी तक घर नहीं आया।
उसने फिर से नितिन को फोन किया, फोन उठाते ही नितिन बोला क्या है! तुम मुझे बार बार क्यों फोन कर रही हो, रूबी बोली तुम कहां हो रात भर तुम घर नहीं आए मै इधर तुम्हारे घर के बाहर कल रात से तुम्हारा इंतजार कर रही हूं। नितिन गुस्से में बोला तुम चली जाओ मैं नहीं आ सकता, रूबी की आंखो में असू आगए रूबी बोली क्यों कर रहे हो ऐसे, मेरी क्या गलती है ये तो बताओ।
नितिन बोला तुम जाओ मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी और फिर फोन रख दिया।
रूबी बहुत रोने लगी उसके पास वापस जाने के आलावा कोई रास्ता नहीं था, वो अनजान शहर में नितिन को कैसे और कहा ढूंढती।
फिर उसने सोचा कि नितिन के पड़ोसियों से एक बार पूछ ले कि नितिन यही रहता है ना कि कहीं और शिफ्ट हो गया है।
उसने पूछा तो उसे पता चला कि पिछले एक महीने से नितिन यहां रहता ही नहीं है। ये सुन कर उसे और बुरा लगा कि नितिन ने उसे कुछ नहीं बताया था कि वो कहीं और शिफ्ट हो गया है, पहले नहीं बताया था ठीक है लेकिन अब जब मै यहां आ गई हूं फिर भी उसने कुछ नहीं बताया और ना ही मिलने आया। वो वहा से अपने घर लौट गई। वो बहुत बेचैन हो रही थी नितिन ऐसा क्यों कर रहा है, वो नितिन को फोन और मेसेज करती थी लेकिन वो ना तो फोन उठता और ना ही मेसेजेस का रिप्लाइ करता था।
कुछ 15 दिनों बाद नितिन का फोन आया, रूबी अपने ऑफिस में थी, उसने तुरंत फोन उठाया और ऑफिस से बाहर निकली बात करने के लिए।
वो पूछने लगी कि नितिन तुम्हे क्या हो गया है तुम मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहे हो मुझसे कोई गलती हुई है तो मुझे बताओ लेकिन मुझे ऐसे इग्नोर नहीं करो, मुझसे बात करो। उधर से नितिन बोला अब प्लीज़ तुम मुझे भूल जाओ मैं किसी और से प्यार करता हूं और उस से शादी करने वाला हूं, और पिछले एक महीने से उसके साथ ही रहता हूं इसली तुमसे मिलने नहीं आया था उस दिन, हो सके तो मुझे माफ़ कर देना, मै अपना फोन नंबर भी बदल रहा हूं।
इतना बोल कर नितिन ने फोन रख दिया।
रूबी ये सब सुन कर तो मानो जैसे उसके पैरो के नीचे से ज़मीन ही निकल गई, उसका दिल बहुत ही तेज़ी से धड़कने लगा, वो रोने लगी और सोचने लगी कैसे 6 साल का रिलेशन ऐसे कोई एक झटके में तोड़ सकता है।
वो उसी वक़्त ऑफिस से घर चली गई, वो बहुत रोई और फिर नितिन को फोन करने लगी कि नितिन ऐसे नहीं कर सकता वो मुझे छोड़ कर नहीं जा सकता, लेकिन जैसे नितिन ने कहा था कि वो अपना नंबर बदल रहा है, तो उसका फोन भी नहीं लगा।
रूबी डिप्रेशन में चली गई थी, वो 15 दिनों तक ऑफिस नहीं गई उस रोज़ ऑफिस से फोन आते थे, आखिर में उसके बॉस ने उसे बोल दिया कि ऐसे ही कुछ दिन और चला तो उसे अपनी नौकरी खोनी पड़ेगी।
फिर कुछ दिनों बाद रूबी ऑफिस जाने लगी लेकिन काम में उसका ध्यान नहीं रहता था। 5 मिहिने हो गए उस बात को अब रूबी धीरे धीरे धीरे संभल रही थी। नितिन ने फिर कभी रूबी को फोन नहीं किया ना रूबी ने फिर कभी उसे फोन किया।